Gold Holding Limit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीदने से बचने की अपील के बाद गोल्ड रखने के नियम चर्चा में हैं। भारत में सोना रखने की कोई कानूनी सीमा नहीं है, लेकिन इनकम टैक्स विभाग तय मात्रा तक गहने जब्त नहीं करता।
Gold Ownership Rules: भारत में सोना सिर्फ निवेश ही नहीं, मुश्किल वक्त का सहारा भी माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के बाद अब एक सवाल फिर चर्चा में आ गया है कि आखिर कोई व्यक्ति घर में कितना सोना रख सकता है। पीएम मोदी ने लोगों से अगले एक साल तक सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी। उनका कहना था कि देश को फिलहाल विदेशी मुद्रा बचाने और गैरजरूरी आयात कम करने पर ध्यान देना चाहिए।
भारत में सोना खरीदने की कोई तय कानूनी सीमा नहीं है। यानी आप जितना चाहें उतना सोना खरीद सकते हैं। लेकिन मामला तब फंसता है, जब आप उसके पैसे का सही हिसाब नहीं दे पाते। अगर सोने का सोर्स स्पष्ट नहीं हुआ, तो इनकम टैक्स विभाग कार्रवाई कर सकता है।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स यानी CBDT ने साल 1994 में एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें इनकम टैक्स अधिकारियों को बताया गया था कि छापेमारी के दौरान कितनी मात्रा तक सोने के गहने जब्त नहीं किए जाएं। नियमों के मुताबिक, शादीशुदा महिला के पास 500 ग्राम तक सोने के गहने होने पर उन्हें जब्त नहीं किया जाएगा। वहीं, अविवाहित महिला के लिए यह सीमा 250 ग्राम तय की गई है। पुरुषों के मामले में नियम थोड़े अलग हैं। चाहे पुरुष शादीशुदा हो या अविवाहित, उसके पास 100 ग्राम तक सोने के गहने होने पर टैक्स अधिकारी उन्हें जब्त नहीं करेंगे। यह लिमिट रेड के दौरान टैक्स अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश के रूप में काम करती है। इससे उन्हें वैध और अवैध गोल्ड होल्डिंग के बीच अंतर करने में मदद मिलती है। इसका मतलब यह नहीं है कि इस लिमिट से ज्यादा सोना नहीं रख सकते।
कई लोग यह समझ लेते हैं कि तय सीमा से ज्यादा सोना रखना गैरकानूनी है, जबकि ऐसा नहीं है। असली मामला सोने के सोर्स का है। अगर आप बता सकते हैं कि सोना कहां से आया, कैसे खरीदा गया और उसके लिए पैसा कहां से आया, तो ज्यादा मात्रा में सोना रखना भी गलत नहीं माना जाएगा। CBDT ने साफ कहा है कि अगर गहनों का जिक्र वेल्थ टैक्स रिटर्न में किया गया है या फिर उसकी खरीद का लीगल सोर्स मौजूद है, तो कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। यहां तक कि कई मामलों में पारिवारिक परंपरा, रीति-रिवाज और सामाजिक स्थिति को देखते हुए तय सीमा से ज्यादा सोना भी जब्त नहीं करते।
यह नियम सिर्फ सोने के गहने और आभूषणों पर लागू होता है। गोल्ड बार, गोल्ड कॉइन, हीरे या दूसरे कीमती पत्थरों वाले गहनों को इसमें शामिल नहीं माना गया है। यानी इन मामलों में इनकम टैक्स विभाग अलग से जांच कर सकता है।
अगर किसी व्यक्ति के पास मिला सोना उसकी इनकम के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता और वह उसका सही कारण नहीं बता पाता, तो मामला महंगा पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में उस सोने पर करीब 60 फीसदी टैक्स लगाया जा सकता है। इसके ऊपर 25 फीसदी सरचार्ज और 4 फीसदी सेस भी देना पड़ता है। कुल मिलाकर टैक्स का बोझ करीब 78 फीसदी तक पहुंच सकता है। इतना ही नहीं, इसके अलावा 10 फीसदी तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यानी सोना खरीदने में कोई रोक नहीं है, लेकिन उसका बिल संभालकर रखना बेहद जरूरी है, वरना बाद में मामला सिरदर्द बन सकता है।