Real Cost of Buying Home India: भारत में प्रॉपर्टी खरीदते समय कई ऐसे छिपे हुए या नजरअंदाज किए जाने वाले चार्ज भी होते हैं। अगर आप शुरू में ही इन पर ध्यान नहीं देंगे, तो आपका कुल बजट आपकी उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ सकता है।
घर खरीदना हर किसी का सपना होता है और यह जीवन के सबसे बड़े फाइनेंशियल फैसलों में से एक है। ज्यादातर लोग घर खरीदते समय सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत और होम लोन की EMI पर ही ध्यान देते है, लेकिन हकीकत यह है कि स्टैम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, GST, लोन प्रोसेसिंग फीस और दर्जनों अन्य चार्जेस मिलाकर आपके कुल बजट का हिसाब बिगड़ जाता है। इस आर्टिकल में उन असली खर्चों की पूरी जानकारी दी गई है, जिनके लिए आपको तैयार रहना चाहिए।
घर खरीदते वक्त सबसे पहला और सबसे बड़ा छुपा खर्च होता है स्टैम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज। यह राज्य सरकार का टैक्स है जो प्रॉपर्टी की कीमत या सर्कल रेट में से जो भी ज्यादा हो, उस पर लगता है। बिना इसके चुकाए आपको घर का कानूनी मालिकाना हक नहीं मिलता। अलग-अलग राज्यों में यह दर अलग होती है।
इसके अलावा अगर आप किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन यानी निर्माणाधीन प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो उस पर GST भी देना होगा। जिन घरों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिल चुका है यानी रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी पर GST नहीं लगता। लेकिन निर्माणाधीन प्रॉपर्टी पर यह अतिरिक्त बोझ बन जाता है जिसकी जानकारी कई बायर्स को बुकिंग के वक्त नहीं होती।
बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी लोन देने से पहले कई तरह की फीस वसूलती है। इसमें एप्लिकेशन प्रोसेसिंग फीस, क्रेडिट असेसमेंट, टेक्निकल इवेल्यूएशन और लीगल वेरिफिकेशन शामिल हैं। इसके साथ ही लोन एग्रीमेंट की स्टैम्पिंग और डॉक्यूमेंटेशन चार्जेस भी अलग से देने होते हैं।
अगर आप भविष्य में लोन जल्दी चुकाना चाहें तो प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्जेस भी लागू हो सकते हैं। इसके अलावा अंडर-कंस्ट्रक्शन घरों पर प्री-EMI भी देनी होती है, जो लोन की पूरी राशि मिलने तक डिसबर्स हुई रकम पर ब्याज के रूप में ली जाती है।
बिल्डर की कोस्ट शीट में अक्सर फ्लोर राइज चार्ज और PLC यानी प्रिफर्ड लोकेशन चार्ज नहीं जोड़े होते। अगर आप ऊंची मंजिल पर या पार्क के सामने, कॉर्नर में, रोड फेसिंग की कोई प्रॉपर्टी पसंद करते हैं तो इसके लिए अलग से प्रीमियम चार्ज लिया जाता है। यह प्रति वर्ग फुट के हिसाब से या एक तय स्लैब में लगाया जाता है।