IMF World Economic Outlook: आईएमएफ ने चेताया है कि ईरान युद्ध आज रुक जाए तब भी 2026 में तेल की किल्लत रहेगी। मार्च में इतिहास की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति बाधा आई है।
IMF global oil shortage: अगर आज रात युद्ध रुक जाए, तब भी 2026 में दुनिया को तेल की कमी झेलनी होगी। यह बात IMF कह रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गुरिंचास ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि अगर आज रात सब कुछ थम जाए और कल से होर्मुज स्ट्रेट खुलने लगे, तब भी इस पूरे साल के लिए तेल की कमी बनी रहेगी। यह सिर्फ एक आर्थिक अनुमान नहीं है। यह एक चेतावनी है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया कि मार्च 2025 में दुनिया की तेल आपूर्ति एक ही झटके में 1 करोड़ 10 लाख बैरल प्रतिदिन कम हो गई। IEA ने इसे इतिहास की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति बाधा बताया। पहले IEA का अनुमान था कि इस साल मांग से 24 लाख बैरल प्रतिदिन ज्यादा तेल उपलब्ध रहेगा। अब वह अनुमान घटकर महज 4 लाख 41 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया है। यानी हालात कितनी तेजी से पलटे, यह इन दो आंकड़ों से ही समझ में आता है।
IMF का कहना है कि युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था अच्छी रफ्तार से चल रही थी। अमेरिका के टैरिफ को लेकर जो अनिश्चितता थी वह कम हो रही थी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश की धूम मची थी। विकास दर ऊपर जाने की उम्मीद थी। गुरिंचास ने कहा, "ग्रोथ की बहुत अच्छी रफ्तार थी। लेकिन फिर युद्ध छिड़ा और दुनिया की आर्थिक तस्वीर अचानक अंधेरे में डूब गई।"
अब IMF ने 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान घटाकर 3.1 फीसदी कर दिया है। जनवरी में यह 3.3 फीसदी था। यह कटौती इस मान पर आधारित है कि युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलेगा।
यहीं पर बात डराने वाली हो जाती है। IMF ने दो बुरे परिदृश्य भी सामने रखे हैं। सबसे बुरी स्थिति यह है कि अगर तेल और गैस की कीमतें जनवरी के मुकाबले 100 से 200 फीसदी तक उछल जाएं और 2027 तक ऊंची बनी रहें, तो इस साल वैश्विक विकास दर महज 2 फीसदी रह जाएगी। 2 फीसदी से नीचे की विकास दर को वैश्विक मंदी माना जाता है। और यह 1980 के बाद सिर्फ चार बार हुआ है। IMF ने इसे साफ शब्दों में "वैश्विक मंदी के करीब" बताया है।
होर्मुज स्ट्रेट करीब-करीब बंद है। दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इसके अलावा प्राकृतिक गैस, हीलियम और खाद भी इसी मार्ग से आती-जाती हैं। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कुछ देशों में ईंधन की कमी होने लगी है। पेट्रोलियम से बनने वाले सामानों की कीमतें चढ़ने लगी हैं।
बुधवार को ऑस्ट्रेलिया के वित्त मंत्री जिम चाल्मर्स ने कहा कि दुनिया एक "बेहद खतरनाक दौर" से गुजर रही है। उन्होंने माना कि ऑस्ट्रेलिया भले ही दूसरे देशों से थोड़ा बेहतर स्थिति में हो, लेकिन इस झटके से बच नहीं पाएगा। उन्होंने कहा, "ऑस्ट्रेलियाई लोगों ने यह युद्ध नहीं चुना, लेकिन वे इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं।" सरकार ने तीन महीने के लिए पेट्रोल और डीजल पर टैक्स आधा कर दिया है ताकि जनता को थोड़ी राहत मिले।