
India US Tariff Update: भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते को लेकर एक जरूरी बात सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया कि भारत का एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल (Indian Delegation) अगले हफ्ते ट्रेड डील के लिए वॉशिंगटन जाएगा। इस दौरे की खास बात यह है कि यह ऐसे समय हो रहा है, जब डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ ढांचे में अचानक आए बदलाव ने सभी देशों पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाया था। इस फैसले से सभी देशों को बराबर फायदा होगा और भारत को अतिरिक्त फायदा नहीं मिलेगा।
इसके साथ ही Section 301 की जांच के दायरे में भारत को भी रखा गया है। इन सभी बड़े घटनाक्रमों के बीच यह दौरा अहम हो जाता है। क्योंकि बातचीत का एजेंडा सिर्फ डील को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि बदले हुए हालात में भारत के हितों को सुरक्षित रखना भी है।
दरअसल शुरुआत में यह डील मार्च में होने वाली थी, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक रेसिप्रोकल टैरिफ को झटका दिया। इसके चलते ट्रंप प्रशासन को टैरिफ में बदलाव करते हुए सभी देशों पर समान रूप से 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए 10 फीसदी टैरिफ लागू करना पड़ा।
फरवरी में जब दोनों देशों ने पहले चरण के द्विपक्षीय व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क फाइनल किया था, तब अमेरिका ने भारतीय सामान पर टैरिफ 18 फीसदी तक घटाने पर सहमति जताई थी। उस वक्त यह भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत थी, क्योंकि भारत को अपने कॉम्पीटीटर देशों जैसे चीन, वियतनाम और बांग्लादेश के मुकाबले कम टैरिफ का फायदा मिलने वाला था। लेकिन 10 फीसदी टैरिफ लागू करने के बाद यह फायदा खत्म हो गया।
इसी बदलाव के चलते पिछले महीने दोनों देशों के मुख्य व्यापार वार्ताकारों की बैठक भी टाल दी गई थी, जिसमें समझौते के कानूनी दस्तावेज (Legal Text) को अंतिम रूप दिया जाना था। यह बैठक फरवरी में होनी थी, जबकि यह पूरी ट्रेड डील का सबसे अहम काम था। अब अगले हफ्ते होने वाली वॉशिंगटन वार्ता में दोनों पक्ष फिर से आगे का रास्ता तय करने की कोशिश करेंगे।
अगले हफ्ते की वार्ता सिर्फ ट्रेड डील तक सीमित नहीं है। इसे और अहम बनाती है अमेरिका की ट्रेड रेप्रेजेंटेटिव ऑफिस यानी USTR द्वारा की गई Section 301 के तहत जांच, जिनमें भारत भी शामिल है। इन जांचों में भारत और चीन समेत करीब 60 देशों को शामिल किया गया है। इसके जरिए अमेरिका यह जांच करना चाहता है कि अलग-अलग देशों की कानून, नीतियां और काम करने के तरीके कहीं अमेरिकी व्यापार और अर्थव्यवस्था के विकास में रुकावट तो पैदा नहीं कर रहे। यह जांच एक तरफ से डील को मजबूत करने के बजाय दबाव का माहौल बना रही हैं।
Updated on:
15 Apr 2026 04:54 pm
Published on:
15 Apr 2026 04:53 pm
