
RBI Guidelines: लोन रिकवरी एजेंट के गलत व्यवहार पर कार्रवाई की जा सकती है। (PC: AI)
Loan Recovery Rules: कई बार ऐसा होता है कि लोग आर्थिक मुश्किलों की वजह से अपने लोन की बकाया राशि समय पर नहीं चुका पाते। ऐसे में बैंकों और NBFCs की तरफ से लोन रिकवरी के लिए लगाई गई थर्ड पार्टी ऐजेंसियां और इनके लोग कर्जदारों को धमकियां देने लगते हैं। सिर्फ धमकियां ही नहीं, बल्कि गाली गलौच और घर या ऑफिस पर आकर बेइज्जती करना या मारपीट करने जैसे मामले भी सामने आते हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिकवरी एजेंटों का गैरकानूनी व्यवहार इसलिए जारी है, क्योंकि बैंक शिकायतें मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं करते और कर्जदारों को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होती। ऐसे में RBI ने ऐसे नियम बनाए हैं, जिनसे रिकवरी ऐजेंटों के खिलाफ शिकायत की जा सकती है।
RBI के फेयर प्रैक्टिसेस कोड के तहत रिकवरी एजेंट को केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही कॉल करने की अनुमति है। वे बार-बार कॉल नहीं कर सकते, गाली-गलौच या धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते और न ही आपके परिवार, दोस्तों, पड़ोसियों या ऑफिस में संपर्क कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर शर्मिंदा करना भी पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
RBI ने इस साल दो अहम ड्राफ्ट जारी किए हैं। ये दोनों 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। पहला ड्राफ्ट RBI (कमर्शियल बैंक्स - रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट) सेकंड अमेंडमेंट डायरेक्शंस 2026 है। दूसरा ड्राफ्ट RBI (NBFC - रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट) डायरेक्शंस 2026 है।
इन नए नियमों के तहत रिकवरी एजेंट के पास विजिट के समय रिकवरी नोटिस की कॉपी, बैंक या एजेंसी का आईडी कार्ड और बैंक का ऑथराइजेशन लेटर होना अनिवार्य होगा। इस लेटर में एजेंट और बैंक के ग्रीवेंस अधिकारी का मोबाइल नंबर भी दर्ज होना जरूरी है। शादी, त्योहार या परिवार में मौत जैसे मौकों पर रिकवरी के लिए आना भी प्रतिबंधित होगा।
अगर कोई रिकवरी एजेंट इन नियमों का उल्लंघन करे तो सबसे पहले संबंधित बैंक या NBFC के ग्रीवेंस रिड्रेसल सेल में लिखित शिकायत दर्ज करें। अगर 30 दिन में समाधान न हो तो RBI के बैंकिंग ओम्बड्समैन यानी बैंकिंग लोकपाल के पास भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। गंभीर मामलों में पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।
अगर कोई व्यक्ति EMI चुकाने में असमर्थ हैं तो किस्त चूकने से पहले ही बैंक से बात करें। पॉलिसी बाजार के हेड ऑफ पेमेंट्स हर्ष वर्धन मस्ता के मुताबिक, जो उधारकर्ता खुद आगे आकर बात करते हैं, बैंक उनकी मदद करने के लिए ज्यादा तैयार रहते हैं। इसके बाद तीन रास्ते हो सकते हैं।
Published on:
01 Jun 2026 04:07 pm
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