
Virat Kohli से भी निवेश के टिप्स सीखे जा सकते हैं। (PC: AI)
एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोहली की क्रिकेट यात्रा में मौजूद सिद्धांत निवेशकों को लॉन्ग टर्म वैल्थ क्रिएशन में मदद कर सकते हैं। यहां कोहली की सफलता की सोच से प्रेरित पैसे से जुड़े पांच अहम सबक दिए गए हैं।
कोहली की सबसे बड़ी पहचान उनकी निरंतरता रही है। उन्होंने वर्षों तक लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शामिल रखा। इसी तरह निवेश की दुनिया में भी यही नियम लागू होता है। तेजी से मुनाफा कमाने की कोशिश अक्सर जोखिम बढ़ाती है।
SIP के जरिए नियमित निवेश लंबे समय में बेहतर परिणाम दे सकता है। शेयर बाजार में निवेश का सही समय खोजने या मल्टीबैगर (बहुत ज्यादा मुनाफा देने वाले शेयर) शेयर ढूंढ़ने के बजाए निवेश का नियमित तरीका अपनाना चाहिए।
खेल की दुनिया में कोहली ने 19 वर्ष की उम्र में IPL में कदम रखा और शुरुआती दौर से ही अपने खेल को लगातार निखारा। इसी तरह निवेश में भी जल्दी शुरुआत करना बेहद जरूरी है। एक्सपर्ट्स हमेशा युवाओं को जल्दी निवेश शुरू करने की सलाह देते हैं, क्योंकि लंबी अवधि में निवेश करने से चक्रवृद्धि ब्याज का जादू स्पष्ट दिखाई देता है। कम राशि से शुरू किया गया निवेश भी लंबे समय में बड़ा फंड तैयार कर सकता है।
कोहली ने सिर्फ एक जगह निवेश नहीं किया बल्कि अपने निवेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जैसे कि रियल एस्टेट, शेयर बाजार में निवेश और बिजनेस में निवेश। आज उनका इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो स्पोर्ट्स-टेक, एथलीजर और टेक-ड्रिवेन स्टार्टअप्स तक फैला हुआ है। एजिलिटास स्पोर्ट्स, वर्ल्ड बॉलिंग लीग, डिजिटल इंश्योरेंस, MPL और Rage Coffee में उनकी हिस्सेदारी शामिल है।
यही रणनीति आम निवेशकों के लिए भी उपयोगी मानी जाती है। इक्विटी, डेट, गोल्ड और अन्य एसेट क्लास में निवेश करने से जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान पोर्टफोलियो का डायवर्सिफिकेशन निवेशक के धन को सुरक्षित रखता है।
कोहली ने अपने करियर में कठिन दौर का सामना करते हुए धैर्य बनाए रखा और लगातार अपने खेल पर ध्यान देकर नई ऊंचाईयों को छुआ। इसी तरह निवेशक को भी बाजार की गिरावट में जज्बाती होकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाए धैर्य रखना चाहिए।
कोहली फिलहाल फिट है, फिर भी उन्होंने इंटरनेशनल T20 और टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया है। उनका सही समय पर रिटायरमेंट लेना निवेशकों को यह संकेत देता है कि रिटायरमेंट का टाइम आने पर निवेश की रणनीति बदल देनी चाहिए। रिटायरमेंट के समय बाजार में निवेश करने के बजाए सुरक्षित जगह जैसे कि गोल्ड या बॉन्ड में इन्वेस्ट करना चाहिए।
Updated on:
01 Jun 2026 02:33 pm
Published on:
01 Jun 2026 02:31 pm
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