ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण सऊदी अरब, UAE, कतर और कुवैत अपने अरबों डॉलर के निवेश वादों और कारोबारी अनुबंधों की समीक्षा करने पर मजबूर हो सकते हैं।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान ने मीडिल ईस्ट के देशों को एक अनचाहे आर्थिक संकट में धकेल दिया है। सऊदी अरब, UAE, कतर और कुवैत ये चारों देश एक ऐसे युद्ध का खामियाजा भुगत रहे हैं, जिसे उन्होंने खुद नहीं शुरू किया था।
ईरान की जवाबी कार्रवाई सीधे इन्हीं देशों की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही है। इन देशों की आय का बड़ा हिस्सा तेल-गैस के निर्यात, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय कारोबार से आता है। लेकिन अब इन तीनों ही मोर्चों पर एक साथ मंदी आ गई है। इसीलिए इन देशों के सामने बजट का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि तीन बड़े खाड़ी देशों ने मिलकर अपने बजट और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव पर मिलकर विचार किया है। इस चर्चा में कई देशों और कंपनियों को किए गए निवेश वादों, खेल आयोजनों की स्पॉन्सरशिप, व्यावसायिक कॉन्ट्रेक्ट और होल्डिंग की बिक्री तक सभी पहलुओं को शामिल किया गया। इन देशों के सामने सबसे बड़ी बाधा यह है कि युद्ध के कारण उत्पन्न आर्थिक बोझ को कैसे कम किया जा सकता है।
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े LNG उत्पादक देश कतर को इस हफ्ते अपने मुख्य LNG संयंत्र पर ड्रोन हमले के बाद उत्पादन पूरी तरह रोकना पड़ा। उसने आधिकारिक तौर पर फोर्स मेजर घोषित कर दिया। इसका सीधा असर उन तमाम देशों और कंपनियों पर पड़ेगा जो कतर से ऊर्जा आयात करते थे।
सऊदी अरब की एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग लगभग ठप हो गई है और कम से कम 10 टैंकर हमलों की चपेट में आ चुके हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ा झटका लगा है।
सऊदी अरब, UAE और कतर दुनिया के कुछ सबसे बड़े और सबसे सक्रिय सॉवरेन वेल्थ फंड चलाते हैं। इन देशों ने राष्ट्रपति ट्रंप की पिछले साल की यात्रा के बाद अमेरिका में सैकड़ों अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया था। अगर ये देश अपने निवेश वादों से पीछे हटते हैं या उन्हें स्थगित करते हैं, तो ट्रंप प्रशासन पर एक कूटनीतिक समाधान खोजने का दबाव और बढ़ जाएगा। यही कारण है कि खाड़ी देशों को अपनी निवेश नीति की समीक्षा का कदम उठाना पड़ रहा है।
प्रमुख उद्योगपति खलफ अल-हब्तूर ने एक्स पर ट्रंप से सीधा सवाल करते हुए खाड़ी देशों की नाराजगी का खुलासा किया। उन्होंने पूछा कि आपको हमारे क्षेत्र को ईरान के साथ युद्ध में खींचने का अधिकार किसने दिया और इस खतरनाक फैसले का आधार क्या था? उन्होंने यह भी याद दिलाया कि खाड़ी के अरब देशों ने स्थिरता और विकास के नाम पर ट्रंप की गाजा पुनर्निर्माण योजना में अरबों डॉलर लगाए थे।