
Income Tax Notice: ITR दाखिल करने के बाद अगर आपको लगता है कि अब टैक्स से जुड़ा कोई काम बाकी नहीं है, तो जरा ठहरिए। रिटर्न जमा करना सिर्फ एक पड़ाव है। इसके बाद भी इनकम टैक्स विभाग की तरफ से नोटिस या इंटिमेशन आ सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 की आय के लिए असेसमेंट ईयर 2026-27 में दाखिल किए जाने वाले ITR पर पुराना इनकम टैक्स एक्ट, 1961 लागू होता है। आईटीआर फॉर्म 1 और 2 के लिए रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 जुलाई 2026 कब की खत्म हो चुकी है। ऐसे में अब वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनर और दूसरे टैक्सपेयर्स को अपना ईमेल, इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल और ई-प्रोसीडिंग्स सेक्शन नियमित रूप से चेक करते रहना चाहिए। देखें कि विभाग की तरफ से कोई नोटिस तो नहीं आया है।
टैक्स नोटिस देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। कई बार विभाग सिर्फ किसी जानकारी की पुष्टि करने, गलती सुधारने या रिटर्न में अंतर को स्पष्ट करने के लिए भी संपर्क करता है। रिटर्न में कोई छोटी-मोटी गड़बड़ी हो, तो उसे ठीक करने का मौका भी दिया जा सकता है। वहीं, अगर मामला अनडिस्क्लोज्ड इनकम, आय में बड़े अंतर या दूसरे गंभीर मुद्दे से जुड़ा है, तो जांच या आगे की कार्रवाई हो सकती है। इसलिए नोटिस को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती हो सकती है।
नांगिया एंड कंपनी एलएलपी के डायरेक्टर इतेश दोधी के मुताबिक, सबसे पहले नोटिस की वास्तविकता जांचनी चाहिए, फिर उसमें उठाए गए मुद्दे को समझकर तय समय के भीतर जवाब देना चाहिए। अगर मामला जटिल है, स्क्रूटनी या री-असेसमेंट से जुड़ा है या जवाब देने को लेकर कोई संदेह है, तो योग्य टैक्स एक्सपर्ट की मदद लेना बेहतर होता है।
यह नोटिस तब आ सकता है, जब रिटर्न की प्रोसेसिंग के दौरान विभाग को किसी क्लेम, टैक्स क्रेडिट या दी गई जानकारी में अंतर या संभावित गलती दिखाई देती है। उदाहरण के तौर पर आपकी ITR में दिखाई गई जानकारी और नियोक्ता, बैंक या किसी अन्य संस्था से मिली जानकारी में अंतर हो सकता है।
क्या करें: नोटिस में बताए गए प्रस्तावित बदलाव को ध्यान से पढ़ें। अपने रिकॉर्ड से उसका मिलान करें। अगर विभाग की बात सही है तो उसे स्वीकार करें। अगर गलती विभाग की तरफ से है, तो संबंधित दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन जवाब दें।
अगर दाखिल किया गया ITR अधूरी जानकारी, जरूरी विवरण न देने या किसी दूसरी कमी के कारण 'Defective Return' माना जाता है, तो सेक्शन 139(9) के तहत नोटिस आ सकता है।
क्या करें: नोटिस में बताई गई कमी को समझें और तय समय सीमा में उसे ठीक करके रिटर्न जमा करें। आयकर विभाग के ई-प्रोसीडिंग्स सिस्टम में 139(9) के ऐसे नोटिस को देखा जा सकता है और उसका जवाब दिया जा सकता है। समय पर सुधार नहीं करने पर रिटर्न के अमान्य माने जाने की स्थिति बन सकती है।
इस नोटिस का मतलब है कि असेसमेंट से जुड़े काम के लिए विभाग को आपसे कुछ अतिरिक्त जानकारी, दस्तावेज या स्पष्टीकरण चाहिए। कुछ मामलों में यह नोटिस उस व्यक्ति को ITR दाखिल करने के लिए भी दिया जा सकता है जिसने रिटर्न दाखिल नहीं किया है।
क्या करें: जो जानकारी या दस्तावेज मांगे गए हैं, उन्हें तय समय के भीतर ई-प्रोसीडिंग्स के जरिए जमा करें। जवाब अधूरा न छोड़ें और जहां जरूरत हो, संबंधित रिकॉर्ड भी लगाएं।
यह अपेक्षाकृत गंभीर तरह का नोटिस हो सकता है। इसके जरिए विभाग रिटर्न में दिखाई गई आय, कटौती, छूट या टैक्स से जुड़े दूसरे दावों की जांच कर सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि टैक्स चोरी साबित हो गई है। लेकिन विभाग आपके रिटर्न की विस्तृत जांच करना चाहता है।
क्या करें: नोटिस में पूछे गए हर सवाल का सही जवाब दें और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराएं। तय समय सीमा का पालन करना बेहद जरूरी है।
अगर असेसिंग ऑफिसर को लगता है कि किसी साल की ऐसी आय है, जो पहले के आकलन में शामिल नहीं हुई, तो कानून में तय शर्तों के तहत री-असेसमेंट की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। ऐसे मामले में सेक्शन 148 के तहत नोटिस आ सकता है।
क्या करें: नोटिस किस आधार पर जारी हुआ है, इसे ध्यान से समझें। जहां जरूरी हो वहां रिटर्न दाखिल करें और विस्तृत जवाब दें। मामला गंभीर होने पर टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना समझदारी होगी।
मान लीजिए आपको किसी साल टैक्स रिफंड मिलना है, लेकिन किसी दूसरे आकलन वर्ष में टैक्स की बकाया मांग दिखाई जा रही है। ऐसे मामले में विभाग रिफंड की रकम को उस पुरानी टैक्स डिमांड के खिलाफ एडजस्ट करने का प्रस्ताव दे सकता है।
क्या करें: सबसे पहले जांचें कि पुरानी टैक्स डिमांड सही है या नहीं। अगर मांग सही है तो एडजस्टमेंट स्वीकार किया जा सकता है। लेकिन अगर टैक्स पहले ही चुका चुके हैं या डिमांड गलत है तो दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करें। इनकम टैक्स विभाग के ई-प्रोसीडिंग्स सिस्टम में सेक्शन 245 के तहत रिफंड एडजस्टमेंट से जुड़ी इंटिमेशन का जवाब देने की सुविधा उपलब्ध है।
अगर किसी आदेश या रिकॉर्ड में ऐसी गलती दिखती है जिसे रिकॉर्ड देखकर स्पष्ट तौर पर पहचाना जा सकता है, जैसे गणना या दूसरी स्पष्ट गलती, तो उसे सुधारने के लिए सेक्शन 154 की प्रक्रिया इस्तेमाल की जा सकती है।
क्या करें: प्रस्तावित सुधार को ध्यान से देखें। गलती सही है तो उसे स्वीकार किया जा सकता है। अगर आपको लगता है कि सुधार गलत है तो उसके खिलाफ उचित कारण और दस्तावेजों के साथ जवाब दें।
यह सामान्य टैक्स नोटिस की तुलना में ज्यादा गंभीर मामला हो सकता है। अगर प्रिंसिपल कमिश्नर को लगता है कि असेसिंग ऑफिसर का दिया हुआ आदेश गलत है और इससे राजस्व को नुकसान हो रहा है, तो कानून के तहत उस आदेश को रिवाइज करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
क्या करें: ऐसे मामले में लिखित जवाब में तथ्य और कानूनी आधार स्पष्ट करना जरूरी है। दस्तावेजों के साथ मजबूत जवाब देना चाहिए। मामला जटिल होने पर टैक्स प्रोफेशनल की मदद लेना बेहतर रहेगा।
सबसे पहले यह जांचें कि नोटिस वास्तव में इनकम टैक्स विभाग की ओर से जारी हुआ है या नहीं। इसके बाद नोटिस में दिए गए सेक्शन, कारण और जवाब देने की आखिरी तारीख को ध्यान से पढ़ें। ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके Pending Actions टैब में e-Proceedings पर क्लिक करके संबंधित सूचना देखी जा सकती है और उपलब्ध मामलों में वहीं से जवाब भी दिया जा सकता है।