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Income Tax Return: इस बार ITR पुराने कानून के अनुसार भरी जाएगी या नए कानून के अनुसार? शुरू हो गया है रिटर्न भरने का प्रोसेस

Income Tax Return: नए इनकम टैक्स एक्ट में ज्वैलरी-प्रॉपर्टी की वैल्यू तय करने का नया फॉर्मूला है। वहीं, डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से कमाई करने हेतु लिए गए लोन पर दिए ब्याज पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी।

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Apr 02, 2026
ITR भरने की प्रोसेस शुरू हो गई है। (PC: AI)

Income Tax Return: नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 एक अप्रैल 2026 से लागू हो गया है। लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जो आइटीआर फाइल किया जाएगा, वह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के मुताबिक ही भरा जाएगा। इस साल आइटीआर फाइलिंग पुराने कानून के अनुसार ही होगी। नया कानून 1 अप्रेल 2026 के बाद की आय पर लागू होगा। आयकर विभाग ने निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न के सभी फॉर्म अधिसूचित कर दिए हैं। जिससे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आइटीआर-1, 2, 3, 5, 6 और 7 के साथ आइटीआर-यू फॉर्म को भी अधिसूचित किया है।

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नए इनकम टैक्स कानून में ये बदलाव भी हुए

टीडीएस नहीं कटने के लिए एक ही डिक्लेरेशन काफी: अब निवेशकों को टीडीएस नहीं कटवाने या कम कटवाने के लिए अलग-अलग जगह फॉर्म देने की जरूरत नहीं है। अब सिर्फ एक ही फॉर्म (15जी और 15 एच) सीधे एनएसडीएल या सीडीएसएल में जमा कर सकते हैं। इस एक फॉर्म से उन्हें डिविडेंड, बॉन्ड या सिक्योरिटी पर ब्याज और म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई जैसी कई आय पर राहत मिल जाएगी। यह नियम उन निवेशों पर लागू होगा जो डिमैट अकाउंट में रखे गए हैं। 15जी और 15एच जैसे अलग-अलग फॉर्म को मिलाकर एक नया फॉर्म बनाया है। इससे बुजुर्गों को राहत मिलेगी।

मेडिकल लोन पर बड़ी राहत: कंपनी से इलाज के लिए मिलने वाले लोन पर टैक्स छूट पहले 20,000 रुपए तक थी, जिसे अब बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दिया।

नए फॉर्म और डिजिटल सिस्टम: वर्ष 2027 में कंपनियों की तरफ से कर्मचारियों को फॉर्म 16 जारी नहीं किया जाएगा। इसे नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत फॉर्म 130 से बदल दिया जाएगा। अन्य फॉर्म के नंबर-नाम भी बदले हैं।

डिविडेंड और म्यूचुअल फंड्स से आय के नियम : 1 अप्रैल 2026 से डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से कमाई करने हेतु लिए गए लोन पर दिए ब्याज पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी। पहले इस पर 20% तक की लिमिट में छूट मिल जाती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह खत्म कर दी गई है। इस तरह की पूरी आय पर सीधे टैक्स लगेगा और इसे 'अन्य स्रोतों से आय' में जोड़ा जाएगा। यानी उधार लेकर निवेश करने पर टैक्स का फायदा नहीं मिलेगा। शेयरधारकों को शेयर बायबैक से मिलने वाला पैसा अब कैपिटल गेन के तौर पर टैक्स किया जाएगा, न कि डिविडेंड माना जाएगा। लअब टैक्स केवल लाभ (खरीद कीमत और बेचने की कीमत के अंतर) पर लागू होगा, जिससे लंबे समय तक निवेश करने वाले लोगों को पहले के मुकाबले ज्यादा फायदा मिलेगा।

कैसे तय होगी प्रॉपर्टी- ज्वैलरी की वैल्यू

ज्वैलरी या कलात्मक वस्तुओं की वैल्यू उस कीमत के आधार पर तय होगी जो वे वैल्यूएशन डेट पर खुले बाजार में बिकने पर हासिल कर सकती हैं। अगर ज्वैलरी रजिस्टर्ड डीलर से खरीदी गई है तो इनवॉइस वैल्यू को मान्य माना जाएगा। वहीं, अन्य तरीके से मिली ज्वैलरी या आर्टवर्क की कीमत 50,000 रुपए से ज्यादा होने पर रजिस्टर्ड वैल्यूअर की रिपोर्ट ली जा सकती है। भूमि या भवन जैसी अचल संपत्ति के मामले में उसकी वैल्यू वही मानी जाएगी जो स्टांप ड्यूटी के लिए सरकारी अथॉरिटी की ओर से तय या आंकी गई हो। इसके अलावा अन्य संपत्तियों के लिए ओपन मार्केट में मिलने वाली सामान्य कीमत को आधार बनाया जाएगा।

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Published on:
02 Apr 2026 11:04 am
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