कारोबार

भारत और ब्राजील पर टैरिफ बढ़े, लेकिन कीमत अमेरिकी उपभोक्ताओं ने चुकाई: रिपोर्ट

कील इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ट्रंप द्वारा भारत और ब्राजील पर लगाए गए 50% तक के टैरिफ का असर विदेशी निर्यातकों पर नहीं पड़ा। अध्ययन के अनुसार, $200 अरब के इस भारी भरकम टैक्स का 96% बोझ अमेरिकी आयातकों और आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ा है।
less than 1 minute read
• •
Updated: 20 Jan 2026, 4:17 AM IST
Donald Trump Tariffs
अमेरिका-भारत टैरिफ समझौता। (AI Generated Image)

Donald Trump Tariffs 2026: एक जर्मन थिंक टैंक के अध्ययन में यह कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित वस्तुओं पर लगाए गए टैरिफ का भुगतान लगभग पूरी तरह से अमेरिकी आयातकों, उनके घरेलू ग्राहकों और अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं द्वारा किया जा रहा है।

कील इंस्टीट्यूट फॉर द वर्ल्ड इकोनॉमी द्वारा सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी टैरिफ में वृद्धि के जवाब में विदेशी निर्यातकों ने अपनी कीमतों में कोई खास कमी नहीं की। साथ ही, अमेरिका के सीमा शुल्क राजस्व में 200 अरब डॉलर की वृद्धि अमेरिकी कंपनियों और परिवारों से वसूले गए 200 अरब डॉलर को दर्शाती है।

ब्राजील और भारत पर केंद्रित इस अध्ययन में पाया गया है कि विदेशी कंपनियों ने टैरिफ का केवल लगभग 4% भार वहन किया है, जबकि 96% भार अमेरिकी खरीदारों पर पूरी तरह से पड़ा है। इन खरीदारों को या तो लागत स्वयं वहन करनी पड़ती है या फिर अपना बिक्री मूल्य बढ़ाना पड़ता है। कील संस्थान के शोधकर्ताओं जूलियन हिंज़, आरोन लोहमैन, हेनड्रिक महल्को और अन्ना वोरविग ने लिखा, यह टैरिफ विदेशी उत्पादकों पर कर के रूप में नहीं, बल्कि अमरीकियों पर उपभोग कर के रूप में कार्य करता है।

निर्यातकों ने तलाश लिए नए बाजार

अध्ययन में पाया गया कि 50% शुल्क लागू होने के बाद, ब्राजील के निर्यातकों ने अपने डॉलर के मूल्य में उल्लेखनीय कमी नहीं की। भारत के मामले में भी ऐसा ही देखने को मिला, जहां पहले 25% शुल्क लगाया गया था, जिसे कुछ हफ्तों बाद बढ़ाकर 50% कर दिया गया। अध्ययन के अनुसार, निर्यातकों द्वारा अधिकांश लागत वहन न करने के कई कारण हैं, जिनमें अन्य बाजारों में बिक्री को पुनर्निर्देशित करने की उनकी क्षमता भी शामिल है।

Updated on:
20 Jan 2026, 4:17 AM IST
Published on: