
Indra Nooyi Interview: पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंद्रा नूई का एक इंटरव्यू इन दिनों सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है। वजह है उस इंटरव्यू के दौरान उनकी कुछ ऐसी टिप्पणियां, जिसमें भारत, चीन और अमेरिका को लेकर लोगों के बीच जमकर बहस छेड़ दी है। किसी को उनकी बातों में सच्चाई लग रही हैं, तो किसी को यह सिर्फ बाहर बैठकर देश की आलोचना करना लग रहा है।
सबसे ज्यादा चर्चा में जो बात है, वह है नूई का यह कहना कि वे भारत में कभी सीईओ नहीं बन पातीं। नूई ने अमेरिका की तारीफ करते हुए कहा कि मैं भारत सहित दुनिया के किसी भी और देश में कभी सीईओ नहीं बन पाती। पर अमेरिका में ये हुआ क्योकि अमेरिका में मेरिट यानी काबिलियत के आधार पर मौके मिलते हैं। इस बयान के बाद से ही वे ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई है। उनके इस बयान पर दो गुट बन गए। एक तबका मान रहा है कि नूई ने कड़वी लेकिन सच बात कही है, तो दूसरा कह रहा है कि यह बात इतनी आसान नहीं है जितनी दिखाई जा रही है।
इस वायरल इंटरव्यू में नूई ने भारत और चीन के फर्क को भी अपने अंदाज में समझाया। उनके मुताबिक चीन में सफाई और अनुशासन है, इसलिए वहां घूमना-फिरना आसान लगता है। लेकिन भारत की पहचान इससे बिल्कुल उलट है। वे आगे कहती हैं कि अगर आपको साफ-सुथरी और व्यवस्थित जिंदगी पसंद है, तो भारत में रहना मुश्किल हो जाएगा। भारत की खूबसूरती उसकी अफरा-तफरी में ही छिपी है। जिसे यह अफरा-तफरी पसंद है, वही यहां टिक पाता है।
चीन की उन्होंने खुलकर तारीफ करते कहा कि चीन ने केंद्रीकृत व्यवस्था के दम पर खुद को अंधेरे दौर से निकालकर दुनिया की बड़ी ताकत बना लिया है। वहीं भारत की धीमी रफ्तार का ठीकरा उन्होंने लोकतंत्र पर फोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत अभी भी विश्व शक्ति बनने के लिए संघर्ष कर रहा है क्योंकि यहां लोकतंत्र है और तरक्की धीरे-धीरे होती है। पर उन्होंने यहां ये भी जोड़ा कि उन्हें खुशी है कि यहां लोकतंत्र है।
नूई के इस बयान पर सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है। एक यूजर ने लिखा कि भारतीयों को सबसे पहले आलोचना सुनना और स्वीकार करना सीखना चाहिए, क्योंकि नूई ने जो कहा वह सच है। कुछ लोगों ने अमेरिका की कार्य संस्कृति की तारीफ करते हुए कहा कि अगर मेहनत करने का जज्बा है और कुछ नया बनाने का दम है, तो वहां लंबी रेस जीतने के पूरे मौके मिलते हैं।
लेकिन कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि जिस अमेरिका की इतनी तारीफ हो रही है, वहां आज तक कोई महिला राष्ट्रपति नहीं बनी। तो फिर महिलाओं के लिए अमेरिका को भारत से ज्यादा प्रगतिशील कैसे कहा जा सकता है। एक यूजर ने उनके इस बयान पर तीखा जवाब देते हुए कहा, ‘मुझे भारत की अफरा-तफरी और विविधता से प्यार है, और मैं यह मानने से इनकार करती हूं कि यही चीज इसे रहने लायक नहीं बनाती। असली दिक्कत तो प्रदूषण, सड़कों पर होने वाली बेरहमी और हर तरफ फैला कूड़ा है।‘
यह बहस अब सिर्फ एक इंटरव्यू तक सीमित नहीं रही। किसी के लिए नूई की बातें गवर्नेंस, बुनियादी ढांचे और मेरिट को लेकर एक कड़वी सच्चाई हैं। किसी और के लिए यह विदेश में सफल हो चुके किसी व्यक्ति की भारत के बारे में बनाई गई एकतरफा राय भर है। लेकिन एक बात तय है कि कार्पोरेट की दुनिया में नूई के इस बयान के बाद अभी कई तरह के एनेलिसिस सामने आएंगे।