डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में पिछले कई महीने से उतार-चढ़ाव जारी है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की गिरती कीमत का अर्थव्यवस्था पर कई तरह से असर पड़ता है। रुपये की गिरावट अर्थव्यवस्था से लेकर आम आदमी पर निगेटिव असर डालती है और देश से लेकर घर का बजट भी बिगड़ जाता है।
Rupee Fall Impact on Economy and People: रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग और दो साल से जारी कोरोना महामारी संकट का असर दुनियाभर के बाज़ारों पर साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया में कभी भी एक बार फिर मंदी दस्तक दे सकता है। भारत में भी इसका असर देखा जा रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले रुपए में लगातार गिरावट देखी जा रही है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 81.20 रुपये प्रति डॉलर तक आ गिरा। इसने करेंसी बाजार के जानकारों से लेकर इंपोर्टर्स और कारोबारियों के लिए चिंता का माहौल बना दिया है। आइए जानते है डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर पड़ने आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा।
रुपए की गिरावट का अर्थव्यवस्था पर कई तरह से असर पड़ता है। भारतीय अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं है। रुपए की कीमत घट जाने से इंपोर्ट महंगा हो जाता है। इससे घरेलू उत्पादन और जीडीपी को काफी नुकसान पहुंचता है। रुपये की गिरावट अर्थव्यवस्था से लेकर आम आदमी पर असर डालती है। इससे देश से लेकर आम आदमी का बजट बिगड़ सकता है।
रुपए की कीमत गिरने से कच्चा तेल महंगा हो जाएगा क्योंकि कच्चे तेल का पेमेंट डॉलर में होता है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ेगी। तेल महंगा होने पर सब्जियों से लेकर रोजमर्रा के सामानों के ट्रांसपोर्ट की लागत पर बड़ा असर पड़ेगा। इससे देश में महंगाई बढ़ने की संभावना है।
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रुपये में गिरावट का सबसे ज्यादा असर इंपोर्टेड पार्ट्स पर पड़ता है। इस कैटेगरी में मोबाइल फोन की सबसे ज्यादा मांग भारत में देखी जाती है। मोबाइल फोन के पार्ट्स महंगे होने के बाद इनकी मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर असेंबलिंग तक सारी प्रकिया की लागत बढ़ जाती है। इस प्रकार से मोबाइल फोन महंगे हो जाएंगे।
डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट से आयातित कलपुर्जे महंगे होंगे, जिससे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडस्ट्री के बड़ा असर पड़ेगा। यह उद्योग महत्वपूर्ण कलपुर्जों के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर करता है। टीवी, फ्रिज, एसी से लेकर कई रेगुलर डिमांड की वस्तुएं जिनमें आयातित पार्ट्स का यूज होता है। ऐसे में इन सभी के दाम बढ़ जाएंगे।
डॉलर की कीमत बढ़ने से जेम्स एंड ज्वैलरी, पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स, ऑटोमोबाइल, मशीनरी के आइटम बनाने वाली कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है। अगर ऐसा होता है तो उनके मार्जिन पर असर पड़ता है। ये चीजों ग्राहकों के पास जाने तक महंगी हो जाएंगी।
रुपये की गिरावट से एक डॉलर के एवज में ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे। जिससे विदेश में छुट्टियां मनाने और इलाज का खर्च बढ़ जाएगा। इन सब पर खर्च डॉलर में करना पड़ता है।
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विदेश में होने वाली बढ़ाई के लिए भी ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। विदेशी शिक्षा संस्थानों की ओर से फीस के रूप में वसूले जाने वाले प्रत्येक डॉलर के लिए ज्यादा रुपया खर्च करना पड़ेगा। इससे पढ़ाई का कुल खर्चा अनुमान से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगा। रुपया गिरने से कई चीजें महंगी होने से आम आदमी पर असर पड़ता नजर आ रहा है।