Interest Rates on Loan: कमर्शियल बैंकों की नए कर्ज की वेटेड एवरेज लेंडिंग रेट (WALR) नवंबर में 0.32 फीसदी बढ़कर 8.71% हो गई, जो सितंबर में 8.39% थी। अक्टूबर और नवंबर दोनों महीनों में फ्रेश लोन्स की ब्याज दरों में बढ़ोतरी हुई है।
Interest Rates on Loans: आरबीआई की ओर से रेपो रेट घटाने के बावजूद बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और छोटी बचत योजनाओं में मिलने वाली ब्याज दरों में कटौती नहीं होने से बैंक अपने एफडी की दरें नहीं घटा पा रहे हैं। इससे बैंकों के मार्जिन (मुनाफे) पर असर पड़ रहा है। इसकी भरपाई के लिए बैंक अब नए लोन को महंगा कर रहे हैं। हालांकि, पुराने लोन की ब्याज दरें अधिकतर मामलों में बैंकों ने रेपो रेट कट के हिसाब से घटाई है। खासकर सरकारी बैंक अपनी कमाई बनाए रखने के लिए ज्यादा ब्याज वाले रिटेल लोन पर फोकस बढ़ा रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि घर, कार और पर्सनल लोन जैसे आम कर्ज अब पहले से ज्यादा ब्याज पर मिल रहे हैं।
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आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वाणिज्यिक बैंकों की नए लोन की वेटेड एवरेज लेंडिंग रेट (WALR) नवंबर में 32 आधार अंक बढ़कर 8.71% हो गई, जो सितंबर में 8.39% थी। अक्टूबर और नवंबर दोनों महीनों में ताजा ऋणों की ब्याज दरों में बढ़ोतरी हुई है। 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड अक्टूबर में 30 आधार अंक और जून के बाद से कल 50 आधार अंक बढ़ चुकी है। इससे बैंकों की फडिंग लागत बढ़ी है और कर्ज महंगा हो गया है।
साथ ही निवेशक छोटी बचत योजनाओं में ज्यादा निवेश कर रहे हैं, जिनमें फॉर्मूला रेट से 1.44% तक ज्यादा ब्याज मिल रहा है। इससे बैंकों में डिपॉजिट घट रहा है और बैंक एफडी की दरें नहीं घटा पा रहे हैं। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर में गोल्ड लोन सालाना आधार पर 125% बढ़ा है। कीमतें बढ़ने से लोग जमकर गोल्ड लोन ले रहे हैं।