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Share Market Outlook: क्या अगले हफ्ते भी जारी रहेगी शेयर बाजार में भारी गिरावट या आने वाली है तूफानी तेजी? एक्सपर्ट्स से समझिए

Share Market Outlook: अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद निफ्टी 24,000 के नीचे आ गया है। DII की खरीदारी से हुई रिकवरी असली नहीं थी। तेल 100 डॉलर के पार है, रुपया कमजोर है और FII की बिकवाली जारी है।

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Apr 25, 2026
मार्केट में बीत 3 सेशंस से गिरावट है। PC: AI

Share Market Outlook: पिछले तीन कारोबारी सत्रों में दलाल स्ट्रीट पर फिर से बिकवाली का तूफान आया है और निफ्टी 50 एक बार फिर 24,000 के नीचे आ गिरा है। अब सबके मन में एक ही सवाल है। क्या बाजार ने अमेरिका-ईरान युद्ध का असर पूरी तरह पचा लिया है या अभी और गिरावट बाकी है? क्या निफ्टी 22,000 का स्तर भी तोड़ सकता है? बाजार के जानकार कह रहे हैं कि खतरा अभी टला नहीं है।

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रिकवरी असली थी या दिखावा?

Bonanza के रिसर्च एनालिस्ट Nitant Darekar ने जो आंकड़े दिए वो चौंकाने वाले हैं। 28 फरवरी 2026 को Operation Epic Fury शुरू होने के बाद से निफ्टी और सेंसेक्स सिर्फ 3 फीसदी गिरे हैं। देखने में लगता है जैसे बाजार ने युद्ध का असर झेल लिया। लेकिन यह रिकवरी घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की जमकर खरीदारी से आई है।

अप्रैल में DII ने 33,837 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि विदेशी निवेशक यानी FII ने 44,281 करोड़ रुपये बाजार से निकाल लिए। फरवरी से अब तक FII कुल 1.61 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। बाजार की नींव कमजोर है। जिस दिन DII का साथ छूटा, उस दिन गिरावट और तेज होगी।

असली दर्द तो तेल का है

Livelong Wealth के SEBI रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट हरिप्रसाद के कहते हैं कि शुरुआती झटका बाजार ने झेल लिया, लेकिन असली मुश्किल अभी बाकी है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। फरवरी में यही तेल 69 डॉलर पर था। यानी 45 फीसदी की उछाल। तेल हर बार 10 डॉलर महंगा होता है तो भारत का चालू खाता घाटा बढ़ता है, रुपया कमजोर होता है। रुपया अभी करीब 94.85 प्रति डॉलर पर आ चुका है। यह सिर्फ एक नंबर नहीं है, यह पूरी अर्थव्यवस्था पर दबाव का संकेत है।

क्या वैल्यूएशन सस्ती हो गई है?

हरिप्रसाद के बताते हैं कि निफ्टी अभी 19 गुना P/E पर ट्रेड कर रहा है, जो लंबे समय के औसत 22 गुना से कम है। यानी बाजार "fair value" के करीब आ गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बाजार बेहद सस्ता हो गया है। जब कमाई पर भी खतरा मंडरा रहा हो तो सस्ते दाम का मतलब बदल जाता है। HSBC जैसी बड़ी ब्रोकरेज फर्म ने भारतीय बाजार पर "underweight" की सलाह दे दी है। विमानन, उपभोक्ता वस्तुएं और IT सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव है। जो सेक्टर थोड़े ठीक हैं वो हैं कमोडिटी और डिफेंसिव शेयर।

क्या कह रहे चार्ट्स?

कोटक सिक्योरिटीज के वीपी टेक्निकल रिसर्च Amol Athawale कहते हैं कि साप्ताहिक चार्ट पर निफ्टी और सेंसेक्स ने "bearish candle" बनाई है। दैनिक चार्ट पर भी उलटफेर के संकेत दिख रहे हैं। उनके मुताबिक 24,000 और 77,000 का स्तर अब सबसे अहम पड़ाव है। अगर बाजार इस स्तर के नीचे रहा तो गिरावट जारी रह सकती है। पहला पड़ाव होगा 23,635 और 76,000।

Bank Nifty की बात करें तो जब तक यह 56,800 के नीचे है, कमजोरी बनी रहेगी। नीचे 55,000 से 54,750 का स्तर देखने को मिल सकता है। ऊपर जाने पर 57,500 से 58,000 पर रुकावट है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, बाजार अभी "खबरों पर चल रहा है।" जैसे ही सीजफायर की खबर आती है बाजार उछलता है, फिर टूटता है। यह भरोसे वाली तेजी नहीं है। जब तक होर्मुज खुला नहीं होता, जब तक तेल 100 डॉलर के नीचे नहीं आता और जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, बाजार में उठापटक बनी रहेगी। जो लोग "buy on dip" की सोच रहे हैं उन्हें थोड़ा और धैर्य रखना होगा।

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Published on:
25 Apr 2026 04:16 pm
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