
IPO Market in September: सितंबर में आईपीओ मार्केट का माहौल अब तक निवेशकों के लिए काफी अच्छा रहा है। इस महीने शेयर बाजार में लिस्ट हुए ज्यादातर नए शेयरों ने इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड किया है। कुछ कंपनियों के शेयरों ने तो लिस्टिंग के बाद काफी अच्छा रिटर्न भी दिया है। लेकिन इसी बीच एनएसई आईपीओ की लिस्टिंग को लेकर तस्वीर थोड़ी अलग नजर आ रही है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी तेजी से घटकर करीब 2% के आसपास आ गया है। ऐसे में जिस आईपीओ की लिस्टिंग को लेकर बाजार में काफी चर्चा थी, उससे अब बड़े लिस्टिंग गेन की उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है।
Ace Equity के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में अब तक 16 आईपीओ शेयर बाजार में लिस्ट हो चुके हैं। इनमें से केवल पांच आईपीओ ऐसे रहे, जिनकी लिस्टिंग इश्यू प्राइस से नीचे हुई। एक आईपीओ की लिस्टिंग इश्यू प्राइस के आसपास ही रही। बाकी आईपीओ ने निवेशकों को लिस्टिंग के दिन ही फायदा दिया। लिस्टिंग के बाद की तस्वीर देखें तो हालात और बेहतर नजर आते हैं। सिर्फ पांच शेयर ऐसे हैं, जो अभी इश्यू प्राइस के मुकाबले फ्लैट या नुकसान में कारोबार कर रहे हैं। यानी ज्यादातर सितंबर IPO अपने इश्यू प्राइस से ऊपर बने हुए हैं। इससे साफ है कि कई शेयरों ने लिस्टिंग के समय मिले फायदे को बरकरार रखा है। कुछ कंपनियों के शेयरों ने कमजोर शुरुआत के बाद भी वापसी की है।
सितंबर में लिस्ट हुए आईपीओ में ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सोल्यूशंस सबसे आगे रहा है। कंपनी का शेयर 429 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 746 रुपये पर लिस्ट हुआ था। यानी निवेशकों को लिस्टिंग के दिन करीब 74% का फायदा मिला। अब शेयर करीब 1,788 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इस हिसाब से इश्यू प्राइस से इसकी बढ़त करीब 310% पर पहुंच गई है।
इसके अलावा ग्लास वॉल सिस्टम्स का शेयर इश्यू प्राइस से करीब 70% ऊपर है। Karamtara Engineering में 44%, Steamhouse India में 39%, Kanohar Electricals में 38%, Lumino Industries में 32% और Rentomojo में करीब 30% की बढ़त दर्ज की गई है।
आईपीओ बाजार में एक दिलचस्प बात भी सामने आई है। जिन कंपनियों की लिस्टिंग कमजोर रही, उनमें से कुछ ने बाद में अच्छी वापसी की। मिसाल के तौर पर Prasol Chemicals का शेयर इश्यू प्राइस से करीब 10% नीचे लिस्ट हुआ था। लेकिन अब यह इश्यू प्राइस से करीब 4% ऊपर कारोबार कर रहा है। इसी तरह Symbiotec Pharmalab की शुरुआत भी कमजोर रही, लेकिन बाद में शेयर इश्यू प्राइस से करीब 13% ऊपर पहुंच गया। दूसरी तरफ, शानदार लिस्टिंग करने वाले सभी शेयर अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख पाए। प्रणव कंस्ट्रक्शन करीब 31% के लिस्टिंग गेन के साथ बाजार में आया था, लेकिन अब इश्यू प्राइस से करीब 17% नीचे है। एलसीसी प्रोजेक्ट्स ने भी करीब 31% की बढ़त के साथ शुरुआत की थी, लेकिन अब इसकी बढ़त घटकर करीब 1% रह गई है। यानी सिर्फ लिस्टिंग का पहला दिन पूरी कहानी नहीं बताता। असली तस्वीर कुछ समय बाद साफ होती है।
सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, सितंबर के आईपीओ का परफॉर्मेंस एनएसई के लिए एक संकेत जरूर देता है, लेकिन दोनों की सीधी तुलना करना ठीक नहीं होगा। इसकी बड़ी वजह एनएसई आईपीओ का आकार है। एनएसई का आईपीओ करीब 22,561 करोड़ रुपये से ज्यादा का है, जबकि सितंबर में लिस्ट हुए ज्यादातर आईपीओ इससे काफी छोटे हैं। बड़े आईपीओ में जोरदार लिस्टिंग गेन के लिए संस्थागत निवेशकों की भारी मांग जरूरी होती है। साथ ही, बड़े इश्यू में बाजार में ट्रेडिंग के लिए ज्यादा शेयर उपलब्ध होते हैं, जिससे लिस्टिंग के समय बिकवाली का दबाव भी बढ़ सकता है।
एनएसई आईपीओ को आखिरी दिन तक निवेशकों की ओर से अच्छी डिमांड मिली। IPO कुल 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन 12.68 गुना रहा। वहीं नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का हिस्सा 6.55 गुना और रिटेल निवेशकों का हिस्सा 1.39 गुना सब्सक्राइब हुआ। यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इसके तहत करीब 12.64 करोड़ शेयरों की बिक्री की गई है। इसका मतलब है कि आईपीओ से मिलने वाला पैसा सीधे एनएसई के पास नहीं जाएगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल ग्रे मार्केट को लेकर है। एनएसई के शेयरों का जीएमपी घटकर करीब 2% रह गया है। आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये तय किया गया था। अगर ऊपरी प्राइस बैंड 1,785 रुपये पर करीब 2% का GMP माना जाए, तो ग्रे मार्केट फिलहाल बहुत मामूली लिस्टिंग बढ़त का संकेत दे रहा है। यह स्थिति उस समय से काफी अलग है, जब एनएसई आईपीओ का प्राइस बैंड सामने आया था और ग्रे मार्केट में ज्यादा उत्साह दिखाई दे रहा था।
डॉ रवि सिंह ने एनएसई के वैल्यूएशन को अहम मुद्दा बताया था। उनके मुताबिक, प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर एनएसई का वैल्यूएशन वित्त वर्ष 2026 की कमाई के करीब 43 गुना पर बैठता है। उन्होंने यह भी कहा था कि एनएसई की ऑपरेटिंग आय में ऑप्शंस ट्रेडिंग से मिलने वाली फीस की बड़ी भूमिका है। ऐसे में रेगुलेटरी बदलाव और बाजार में ट्रेडिंग की भागीदारी एनएसई के कारोबार पर असर डाल सकती है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)