Petrol Diesel Price: कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर पार पहुंचने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। तेल कंपनियां घाटे में हैं, लेकिन सरकार महंगाई के डर से फैसला टाल रही है।
Petrol Diesel Price: देश में पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल थमे हुए हैं, लेकिन हालात ऐसे हैं कि “आगे कुआं, पीछे खाई” वाली स्थिति बन गई है। एक तरफ तेल कंपनियों को भारी घाटा हो रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार के सामने महंगाई बढ़ने का खतरा खड़ा है। ऐसे में दाम बढ़ाने का फैसला आसान नहीं दिख रहा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका की तरफ से ईरान पर सख्ती बढ़ाने के संकेत हैं, जिससे होर्मुज स्ट्रेट के लगातार बाधित रहने का डर है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है।
सरकारी तेल कंपनियां यानी OMCs अब खुलकर दाम बढ़ाने की मांग कर रही हैं। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और एटीएफ पर उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। अंदरखाने यह बात सामने आई है कि कंपनियां अब ज्यादा दिन तक यह बोझ नहीं झेल पाएंगी। हालांकि, सरकार फिलहाल जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के मूड में नहीं है।
पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि सरकार की कोशिश रही है कि आम जनता पर कम से कम असर पड़े। लेकिन असली तस्वीर समय के साथ ही साफ होगी। सरकार पहले से ही एलपीजी और खाद पर भारी सब्सिडी दे रही है, ऐसे में पेट्रोल-डीजल का बोझ उठाना सरकारी खजाने पर भारी पड़ सकता है।
फरवरी के मुकाबले अप्रैल में पेट्रोल-डीजल के अंतरराष्ट्रीय दामों में भारी उछाल आया है। वैश्विक बाजार में डीजल करीब दोगुना महंगा हो गया है। पेट्रोल में 60% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। एलपीजी 40% से ज्यादा महंगी हुई है। वहीं, फ्लाइट फ्यूल की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चा तेल करीब 73 डॉलर पर था, जो अब 120 डॉलर के ऊपर पहुंच गया है। यह स्तर इतिहास में गिने-चुने मौकों पर ही देखा गया है।
सरकार ने अभी तक आम ग्राहकों के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं, जबकि प्रीमियम पेट्रोल, बल्क डीजल और इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए ईंधन के दाम बढ़ाए जा चुके हैं। घरेलू एलपीजी में भी सिर्फ 50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। शुरुआत में उम्मीद थी कि कंपनियां पुराने मुनाफे के सहारे नुकसान संभाल लेंगी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो दाम बढ़ाना लगभग तय माना जा रहा है।