प्री-बजट बैठक में तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेनारासु ने टैरिफ, जीएसटी और लंबित परियोजनाओं के कारण अर्थव्यवस्था पर दबाव की बात कही। राज्य के अनुसार मौजूदा हालात बने रहने पर मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई सेक्टर में लगभग 30 लाख नौकरियां जोखिम में आ सकती हैं।
Budget 2026: केंद्रीय बजट आने से पहले राज्यों के साथ होने वाली प्री-बजट बैठकों में आर्थिक स्थितियों और नीतिगत प्रभावों पर चर्चा की जाती है। इसी क्रम में तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेनारासु ने अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ोतरी, जीएसटी से जुड़े मुद्दों और लंबित परियोजनाओं के चलते राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ रहे दबाव को प्रमुखता से उठाया। बैठक में राज्य के वित्त मंत्री ने कहा कि यदि मौजूदा हालात बने रहे तो तमिलनाडु में लगभग 30 लाख नौकरियां जोखिम में आ सकती हैं, जिसका सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल और एमएसएमई सेक्टर पर दिखेगा।
थंगम थेनारासु ने प्री-बजट चर्चा में बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था काफी हद तक एक्सपोर्ट पर निर्भर है और हाल की अंतरराष्ट्रीय टैरिफ नीतियों से इस पर नकारात्मक असर पड़ा है। राज्य से होने वाले कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से जुड़ा है, जिससे ट्रेड में किसी भी तरह की रुकावट सीधे उद्योगों को प्रभावित करती है। विशेष रूप से टेक्सटाइल सेक्टर का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यह क्षेत्र लाखों लोगों को रोजगार देता है और टैरिफ बढ़ने से ऑर्डर, उत्पादन और रोजगार तीनों पर दबाव बन रहा है।
तमिलनाडु ने केंद्र से लंबित परियोजनाओं का मुद्दा भी उठाया, जिसमें मेट्रो रेल जैसी दीर्घकालिक योजनाएं शामिल हैं। राज्य का कहना है कि स्वीकृति मिलने के बावजूद फंड रिलीज में देरी होने से वित्तीय संकेतकों पर असर पड़ता है और उधारी सीमा सीमित हो जाती है। इसके अलावा कुछ केंद्रीय योजनाओं में बदले गए फंडिंग पैटर्न से राज्य पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की बात भी कही गई। राज्य सरकार ने संकेत दिया कि इन कारकों का संयुक्त प्रभाव उद्योग, निवेश और रोजगार पर दिखाई दे रहा है।
प्री-बजट बैठक में जीएसटी से जुड़े राजस्व नुकसान को भी प्रमुखता से रखा गया। थेनारासु का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में जीएसटी के कारण लगभग 10,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू लॉस हो सकता है। राज्य के वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू करते समय राजस्व सुरक्षा का भरोसा दिया गया था, लेकिन मुआवजा सिस्टम में अनिश्चितता से बजट प्लानिंग प्रभावित हो रही है। इसके अलावा थेनारासु ने बताया कि चेन्नई मेट्रो रेल फेज-2 को अक्टूबर 2024 में मंजूरी मिलने के बावजूद अभी तक पूरा फंड नहीं मिला है, जबकि राज्य सरकार परियोजना में अपनी हिस्सेदारी के तौर पर पहले ही करीब 9,500 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। कुछ केंद्रीय योजनाओं में बदले गए फंडिंग पैटर्न, जैसे VB G RAM G, से राज्य पर लगभग 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने की बात भी सामने रखी गई।