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RBI Repo Rate: महंगे हो सकते हैं लोन, RBI ने रेपो रेट में की बढ़ोतरी, GDP ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ाया

Repo Rate Hike: होम लोन समेत कई तरह के दूसरे लोन्स महंगे हो सकते हैं। अगर आपके कर्ज पर फ्लोटिंग ब्याज दर है, तो आपको बढ़ी हुई ईएमआई देनी पड़ सकती है। आरबीआई ने करीब साढ़े 3 साल बाद रेपो रेट बढ़ाने का फैसला लिया है।
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Oct 07, 2026
RBI Repo Rate
आरबीआई ने रेपो रेट पर फैसला सुनाया है। (PC: AI)

RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट बढ़ाने का फैसला हुआ है। रेपो रेट को 0.25 फीसदी बढ़ा दिया गया है। आरबीआई ने साढ़े 3 साल से अधिक समय में यह पहली रेट हाइक की है। रेपो रेट में बढ़ोतरी से बैंकों को आरबीआई से मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाता है। इससे बैंक ग्राहकों के लिए लोन पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। साथ ही आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5.2 फीसदी रखा है।

पहले फरवरी 2023 में बढ़ाई थी ब्याज दर

तीन दिन तक चली RBI MPC की बैठक बुधवार को खत्म होने के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह घोषणा की। करीब साढ़े तीन साल के अंतराल के बाद आरबीआई ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। इससे पहले फरवरी 2023 में रिजर्व बैंक ने प्रमुख ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 6.50% किया था। इसके बाद 2023-24 के दौरान रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। वहीं, 2025 में आरबीआई ने ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू किया था। इस समय पॉलिसी रेपो रेट 5.25% है।

RBI ने बढ़ाया GDP ग्रोथ का अनुमान

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 0.40 फीसदी बढ़ाकर 7.1% कर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। मल्होत्रा ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंची कमोडिटी कीमतें, वैश्विक व्यापार में बढ़ती अड़चनें और दुनिया भर में सख्त होती वित्तीय परिस्थितियां भारत की आर्थिक ग्रोथ के आउटलुक पर असर डाल सकती हैं।

'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' किया पॉलिसी का रुख

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपने रुख को न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। मौद्रिक नीति समिति का यह फैसला अगस्त की पॉलिसी से अलग है। अगस्त में एमपीसी ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था और पॉलिसी का रुख न्यूट्रल बनाए रखा था। उस समय समिति महंगाई के आउटलुक और ग्रोथ तथा महंगाई के बीच संतुलन को लेकर ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रही थी। इस बार रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह बढ़ता महंगाई जोखिम और वैश्विक स्तर पर ऊंची बॉन्ड यील्ड को बताया गया। इन परिस्थितियों ने मौद्रिक नीति को और सख्त करने की जरूरत को मजबूत किया। रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है।

क्या है SDF और MSF?

रेपो रेट बढ़ने के बाद स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.25% हो गया है। वहीं, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट 5.75% पर हैं। आरबीआई एमपीसी ने बहुमत के आधार पर अपने रुख को कैलिब्रेटेड टाइटनिंग करने का फैसला किया।

महंगाई को लेकर RBI का सख्त रुख

अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ाने का फैसला इस बात को दिखाता है कि महंगाई से जुड़े चक्रीय जोखिम अब कम नहीं हैं। नीति के रुख में बदलाव से एमपीसी का महंगाई को लेकर सख्त रुख भी साफ होता है। ऊंची तेल कीमतों, वैश्विक स्तर पर सख्त वित्तीय परिस्थितियों और खराब मौसम के कारण खाद्य महंगाई बढ़ने के जोखिम के बीच नीति निर्माताओं ने इन जोखिमों के गहराने से पहले महंगाई पर नियंत्रण को मजबूत करने का फैसला किया है।

Updated on:
07 Oct 2026 11:36 am
Published on:
07 Oct 2026 10:04 am