Repo Rate India: आरबीआई ने रेपो रेट स्थिर रखकर बाजार को संतुलन का संकेत दिया है। EMI में तत्काल राहत नहीं, लेकिन बढ़ोतरी भी नहीं। ग्लोबल दबाव के बीच निवेश और उधार निर्णयों में सावधानी जरूरी है।
बुधवार को आरबीआई ने अपनी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई के इस फैसले से उधारकर्ता और निवेशकों दोनों के लिए संतुलित संकेत मिल रहे हैं और बाजार में स्थिरता की उम्मीद बनी हुई है। इसका सीधा असर आम नागरिक पर दिखाई देगा। रेपो रेट में होने वाला कोई भी बदलाव सीधा आपकी EMI पर असर डालता है, जिससे EMI के स्थिर रहने की संभावना है। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखकर वेट-एंड-वॉच की रणनीति अपनाई है। पिछले कुछ सालों से बढ़ती ब्याज दरों में यह ठहराव थोड़ी राहत देता है।
रेपो रेट के स्थिर रहने का सीधा असर लोन और निवेश दोनों के फैसलों पर पड़ता है। यह खासतौर पर तब महत्वपूर्ण है जब आपका लोन रेपो रेट से जुड़ा हुआ है। क्योंकि इसमें कोई भी बदलाव सीधे आपकी मासिक EMI को प्रभावित करता है। जिन लोगों ने होम लोन या बिजनेस लोन लेने की योजना बनाई है, उनके लिए मौजूदा दरों को लॉक करना बेहतर विकल्प माना जा रहा है। क्योंकि ब्याज दरों में तत्काल कटौती की संभावना कम दिख रही है।
इसके चलते होन लोन की EMI में तुरंत कोई बदलाव होने की संभावना कम है। इसके साथ ही कार लोन या पर्सनल लोन की ब्याज दरें भी स्थिर रहने की संभावना है और नए लोन लेने वालों के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
आरबीआई के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 में GDP वृद्धि दर 6.9 फीसदी रहने की उम्मीद है। साथ ही महंगाई 4.6 फीसदी रहने की संभावना है, जोकि लक्ष्य के अनुमान के भीतर ही है। भले ही अभी महंगाई लक्ष्य के दायरे में है, लेकिन चिंता यह है कि यह ज्यादा समय तक नियंत्रण में नहीं रह सकती। क्योंकि वैश्विक हालात बिगड़ते हैं तो ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर फिर दबाव बढ़ सकता है।
भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के लिए सीबीआरई के सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा कि स्थिर रेपो रेट रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है। स्थिर EMI से होमबायर का भरोसा मजबूत होता है और मांग स्थिर रहती है। वर्ष के अंत तक महंगाई में संभावित कमी से बिजनेस विस्तार और उपभोक्ता खर्च बढ़ने की उम्मीद है। इससे रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में मांग मजबूत रहने की संभावना जताई जा रही है। इससे डेवलपर्स और निवेशकों को दीर्घकालिक स्थिरता मिल सकती है।