Rupee to Dollar: आज, 12 फरवरी को भारतीय रुपया ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 27 पैसे की मजबूती दर्ज की और 86.52 के स्तर पर पहुंच गया। आइए रुपए की मजबूती के पीछे के कारणों पर एक नजर डालते हैं।
Rupee to Dollar: आज 12 फरवरी बुधवार के दिन भारतीय रुपये (Rupee to Dollar) ने लगातार दूसरे सत्र में मजबूती दर्ज की और बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 27 पैसे चढ़कर 86.52 के स्तर पर पहुंच गया। रुपये की यह बढ़त कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विभिन्न उपायों से मिली राहत के कारण देखने को मिली। हालांकि, घरेलू शेयर बाजार (Share Market) में अस्थिरता, विदेशी पूंजी की निकासी और अमेरिकी मुद्रा की मजबूती (Rupee to Dollar) ने रुपये की बढ़त को सीमित कर दिया।
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 86.44 के स्तर पर खुला और शुरुआती सौदों में 86.36 के उच्चतम स्तर को छूने के बाद 86.52 पर कारोबार करता दिखा। यह पिछले बंद स्तर की तुलना में 27 पैसे की बढ़त दर्शाता है। मंगलवार को रुपये (Rupee to Dollar) में 66 पैसे की तेज मजबूती देखने को मिली थी, जो 3 मार्च 2023 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त थी। इससे पहले, सोमवार को रुपया कारोबार (Rupee to Dollar) के दौरान 88 प्रति डॉलर के करीब चला गया था, लेकिन बाद में 87.45 के स्तर पर बंद हुआ था।
फॉरेक्स कारोबारियों के अनुसार, रुपये की यह मजबूती कई कारकों का परिणाम है—
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 0.31% की गिरावट के साथ 76.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिससे रुपये को सहारा मिला।
RBI के हस्तक्षेप: भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों ने रुपये को स्थिर रखने में मदद की। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ने रुपये की अत्यधिक गिरावट को रोकने के लिए बाजार में डॉलर की बिक्री की थी।
मंगलवार को आई तेजी की निरंतरता: मंगलवार को रुपये में 66 पैसे की मजबूती आई थी, जिसका असर बुधवार के शुरुआती कारोबार में भी दिखा।
हालांकि रुपये में सुधार जारी रहा, लेकिन इसकी रफ्तार कुछ हद तक सीमित रही। इसके पीछे कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं—
फॉरेक्स विश्लेषकों का मानना है कि रुपये की आगे की चाल घरेलू और वैश्विक बाजार के घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है और अमेरिकी डॉलर में नरमी आती है, तो रुपये को और मजबूती मिल सकती है। हालांकि, विदेशी पूंजी निकासी (Rupee to Dollar) और अमेरिकी टैरिफ नीति का प्रभाव रुपये की मजबूती को सीमित कर सकता है।