बजट से पहले आई गिरावट के बाद शेयर बाजार ने ज्यादातर मौकों पर मजबूत रिकवरी दिखाई है। फार्मा और फाइनेंशियल सेक्टर ने बजट के बाद बेहतर प्रदर्शन किया है।
Budget 2026 Share Market Impact: घरेलू शेयर बाजार में हर साल केंद्रीय बजट से पहले कुछ हद तक दबाव और अनिश्चितता देखी जाती है। निवेशक नीतिगत घोषणाओं और टैक्स से जुड़े फैसलों को लेकर सतर्क रहते हैं, जिससे बाजार में बदलाव आता है। इसी कड़ी में बजट से पहले आई हालिया गिरावट के बाद अब बाजार में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। SBI सिक्योरिटीज के विश्लेषण के अनुसार, प्री-बजट करेक्शन के बाद भारतीय शेयर बाजार ने ज्यादातर मामलों में मजबूत रिकवरी दर्ज की है और यह ट्रेंड एक बार फिर दोहराता नजर आ रहा है।
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रिपोर्ट के अनुसार पिछले 15 बजट चक्रों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह साफ होता है कि बजट से करीब एक महीने पहले सेंसेक्स और निफ्टी में कई बार 3 प्रतिशत या उससे ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। फरवरी 2014, फरवरी 2016 और फरवरी 2021 ऐसे उदाहरण हैं, जब बाजार में प्री-बजट करेक्शन देखा गया। हालांकि, इन सभी मौकों पर बजट आने के बाद बाजार ने सकारात्मक रुख दिखाया। आंकड़ों के मुताबिक, बजट के अगले एक हफ्ते, एक महीने और तीन महीने की अवधि में मुख्य इंडेक्स ने ज्यादातर मामलों में पॉजिटिव रिटर्न दिए। इससे यह संकेत मिलता है कि बजट से पहले की गिरावट अक्सर निवेशकों के लिए अवसर बन जाती है।
रिपोर्ट में सामने आया है कि बजट के बाद के हफ्ते में सेंसेक्स 15 में से 11 बार बढ़त के साथ बंद हुआ। इस दौरान औसतन करीब दो प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। तीन महीने की अवधि में भी सेंसेक्स ने नौ बार सकारात्मक रिटर्न दिए। निफ्टी का प्रदर्शन भी इसी तरह रहा, जिसने 15 में से 12 बार मजबूती दिखाई। तीन महीने के नजरिये से निफ्टी ने औसतन 7 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया। इससे यह साफ होता है कि बजट के बाद बाजार में स्थिरता और भरोसा लौटता है, जिससे निवेशक दोबारा सक्रिय होते हैं।
सेक्टर के स्तर पर देखें तो फार्मा और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों ने बजट के बाद लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। फार्मा सेक्टर 15 में से 14 बार बजट के बाद के हफ्तों में बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों ने भी मजबूत रिटर्न दिए। इसके उलट ऑटो और रियल्टी सेक्टर का प्रदर्शन इनके मुकाबले कमजोर रहा है। इसके अलावा, बजट के दिन और उसके बाद इंडिया VIX में गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार में घटती अस्थिरता और निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत देती है। कुल मिलाकर, इतिहास बताता है कि प्री-बजट करेक्शन के बाद बाजार में रिकवरी की संभावना बनी रहती है और निवेशक इस ट्रेंड को ध्यान में रखकर रणनीति बना सकते हैं।