
भारतीय रुपये में गिरावट जारी। फोटो: एआइ
भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी का दौर जारी है और बुधवार को इसमें ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने क्रूड ऑयल कीमतों को ऊंचा बनाए रखा है, जिससे भारत जैसे आयातक देश पर दबाव बढ़ा है। इसी बीच 18 मार्च को रुपया पहली बार 92.50 के स्तर को पार कर 92.57 प्रति डॉलर तक गिर गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले से पहले बाजार में अनिश्चितता को भी दर्शाती है।
रुपये की इस गिरावट का सीधा असर भारत की इकोनॉमी पर पड़ सकता है, खासकर आयात लागत पर। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, और महंगा क्रूड ऑयल देश के ट्रेड डेफिसिट को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार कम आकर्षक हो सकते हैं, जिससे कैपिटल इनफ्लो में कमी देखी जा सकती है। पिछले सप्ताह का 92.4750 का स्तर टूटना यह संकेत देता है कि रुपये पर दबाव लगातार बना हुआ है और निकट भविष्य में इसमें स्थिरता की उम्मीद कम है।
रुपये में कमजोरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला। वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों के चलते सेंसेक्स 858 अंक बढ़कर 76,929.30 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 में 255 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 23,836 के स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों का भरोसा बना हुआ है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तेजी अस्थायी हो सकती है, क्योंकि वैश्विक जोखिम अभी भी बने हुए हैं और क्रूड ऑयल की कीमतें बाजार की दिशा तय कर सकती हैं।
क्रूड ऑयल की कीमतें फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो वैश्विक सप्लाई में बाधा और मिडिल ईस्ट तनाव का परिणाम है। हालांकि इराक द्वारा तुर्की के जरिए सप्लाई शुरू होने से थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है, फिर भी ईरान संघर्ष के चलते स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की बैठक आज समाप्त होने वाली है, जिसमें ब्याज दरों को स्थिर रखने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन महंगाई और ग्रोथ के बीच संतुलन बनाना फेड के लिए चुनौती बना हुआ है।
Published on:
18 Mar 2026 04:52 pm
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