18 मार्च 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Israel Iran War: सिर्फ तेल-गैस ही नहीं, होर्मुज बंद होने से चरमराई ग्लोबल सप्लाई चेन, इन सेक्टर्स पर पड़ रहा भारी असर

Israel Iran War: होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन चरमरा गई है। सबसे ज्यादा नुकसान मैन्युफैक्चरिंग, परिवहन और खाद्य उत्पादन जैसे सेक्टर्स को हुआ है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Pawan Jayaswal

Mar 18, 2026

Israel Iran War

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कई सेक्टर्स को नुकसान हुआ है। (PC: AI)

Israel Iran War: ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट में आवागमन बाधित होने से ग्लोबल सप्लाई चेन गहरे संकट में है। इस युद्ध का असर अब सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहा, जो प्रति बैरल 103 डॉलर के पार हो चुका है। बल्कि इसका असर ईंधन, उर्वरक, धातु, पेट्रोकेमिकल और यहां तक कि दवा उद्योग तक फैल चुका है। खाड़ी क्षेत्र, जो दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा और कच्चे माल की आपूर्ति करता है, वहां से निर्यात लगभग ठप हो गया है। इसने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है।

परिवहन, मैन्युफैक्चरिंग और खाद्य उत्पादन, ये तीनों प्रमुख सेक्टर दबाव में आ चुके हैं। पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि उर्वरकों और जरूरी रसायनों की कमी से कृषि उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है। एशिया, यूरोप और अमरीका जैसे बड़े क्षेत्र इस संकट की चपेट में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो इसका असर 2026 की फसल से लेकर 2027 तक औद्योगिक उत्पादन पर दिखाई देगा।

रिफाइनिंग 5-15% घटी

एशियाई रिफाइनरियों को वैकल्पिक तेल महंगा मिल रहा है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। डीजल और जेट फ्यूल की कमी हो रही है। चीन, भारत, जापान और थाईलैंड जैसे देशों में रिफाइनिंग 5-15% तक घट गई है। इससे चीन ने रिफाइंड उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी है, जिससे सिंगापुर जैसे एशियाई ट्रेडिंग हब में कीमतें उछल गई हैं। यूरोप भी दबाव में है, क्योंकि वह जेट फ्यूल का बड़ा हिस्सा खाड़ी और एशिया से आयात करता है।

मेटल में उथल-पुथल

एल्युमिनियम की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर इसकी कीमत चार साल के उच्च स्तर 3,440 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है। खाड़ी के स्मेल्टर गैस और कच्चे माल की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि निर्यात भी बाधित है। यूरोप और अमरीका जो खाड़ी सप्लाई पर निर्भर हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। वहीं, ईरान से आने वाले सेमी- फिनिश्ड स्टील की सप्लाई घटने से कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

हीलियम संकट से टेक इंडस्ट्री पर खतरा

इस संकट का असर हीलियम पर भी पड़ा है। यह गैस सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में बेहद जरूरी होती है । कतर, जो वैश्विक हीलियम सप्लाई का लगभग एक-तिहाई उत्पादन करता था, उसका प्रमुख रास लाफान प्लांट बंद हो गया है। हीलियम का कोई आसान विकल्प नहीं होने के कारण चिप उद्योग पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक सेक्टर में उत्पादन बाधित हो सकता है।

फार्मा सेक्टर पर भी संकट

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर संकट में है। यह खाड़ी के पेट्रोकेमिकल सप्लाई पर निर्भर है। नैफ्था, स्टाइरीन और पॉलीइथिलीन जैसे प्रमुख कच्चे माल का निर्यात बाधित हो गया है। दवा उद्योग पर भी असर साफ दिख रहा है, क्योंकि दवाओं के एक्टिव कंपाउंड पेट्रोकेमिकल्स से बनते हैं। भारत और चीन जैसे बड़े फार्मा हब इस सप्लाई पर निर्भर हैं। इसके अलावा, औद्योगिक हीरे, ग्लाइकोल और मेथेनॉल जैसी चीजों की कमी से केमिकल सेक्टर पर दबाव है।

वैश्विक खाद्य सुरक्षा

खाद्य उत्पादन पर इसका सबसे गंभीर असर पड़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के एक-तिहाई समुद्री उर्वरक व्यापार गुजरता है। युद्ध के बाद से यूरिया के दाम 35% और सल्फर के दाम 40% तक बढ़ चुके हैं। किसानों के सामने विकल्प सीमित हैं, या तो महंगी खाद खरीदें या कम इस्तेमाल करें।