Share Market Investment Tips: भू-राजनीतिक हालातों से प्रभावित होने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर एसेट एलोकेशन करना चाहिए।
Share Market Investment Tips: निवेशकों के लिए सबसे बड़ा खतरा सिर्फ शेयर बाजार में भारी उठापटक नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं में आकर पैनिक सेलिंग करना है। वाइटओक कैपिटल एएमसी की नई रिपोर्ट के मुताबिक, जंग के समय में सबसे सुरक्षित तरीका है अपनी पहले से तय एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी पर टिके रहना। रिपोर्ट में बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि तेज उतार-चढ़ाव और डराने वाली खबरों के बावजूद सैन्य संघर्ष का लंबी अवधि में रिटर्न पर असर सामान्यतः कम होता है। फंड हाउस का कहना है कि संकट के दौरान भावनाओं में आकर लिए गए निर्णय अक्सर निवेशकों के लिए वास्तविक संकट से ज्यादा नुकसानदेह साबित होते हैं। सही एसेट एलोकेशन बाजार के झटकों को झेलने के लिए एक ढाल के रूप में काम करता है।
अच्छी तरह से डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में अनिश्चितता के दौर में सुरक्षा पहले से ही शामिल होती है। इसकी वजह यह है कि वे अक्सर गलत समय पर बाजार से बाहर निकल जाते हैं। इसके बाद वे लंबे समय तक निवेश से दूर रहते हैं और फिर बाजार के ऊंचे स्तर पर दोबारा निवेश करते हैं। कई बार तो वे दोबारा बाजार में लौट ही नहीं पाते।
'पैनिक सेल क्राइसिस'
बाजार गिरने के बाद आप यह सोचकर शेयर बेच देते हैं कि हालात अभी और खराब होंगे। इसके बाद आप खुद को सुरक्षित और समझदार महसूस करते हुए पैसा कैश या गोल्ड में लगा देते हैं।
'फ्रोजन वेट' का दौर
बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहता है। कुछ दिन तेजी, तो कुछ दिन गिरावट। ऐसे में निवेशक दोबारा निवेश करने से पहले हालात के सामान्य होने का इंतजार करते हैं। पर छोटी अवधि में स्पष्टता शायद ही कभी मिलती है। टीवी चैनलों की हेडिंग डर पैदा करती रहती हैं।
'पेनफुल मिस' का दौर
जब बाजार निचले स्तर से 20%, 30% या 40% तक उछाल मार लेते हैं, तब भी आप कैश में बैठे रहते हैं। अब बाजार में दोबारा निवेश करना महंगा लगता है। इस तरह आपने न सिर्फ नुकसान को लॉक कर लिया, बल्कि रिकवरी का मौका भी गंवा दिया।
खासकर अगर आप टीवी न्यूज चैनलों को सुनें तो हालात बेहद गंभीर लगने लगते हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में ये अर्थव्यवस्था की बुनियादी व्यवस्था को नहीं तोड़ते। भू-राजनीतिक झटके अक्सर भावनाओं से जुड़े झटके होते हैं। ये डर, अस्थिरता और नाटकीय सुर्खियां पैदा करते हैं। इसलिए भू-राजनीतिक उतार चढ़ाव के समय सही रणनीति यह नहीं है कि आप अपना पोर्टफोलियो बार-बार बदलें, बल्कि अपनी तय रणनीतिक एसेट एलोकेशन पर अनुशासन के साथ टिके रहें और बाजार की अस्थिरता को धैर्य के साथ झेलें।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों को अपना एसेट एलोकेशन अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर तय करना चाहिए, न कि भू-राजनीतिक हालात को देखकर। उदाहरण के लिए, एक मध्यम जोखिम उठाने वाले निवेशक के लिए पोर्टफोलियो में 65% इक्विटी, 25% डेट और 10% गोल्ड रखा जा सकता है। इसके साथ बैलेंसिंग की एक सीमा (आमतौर पर 5%) तय करनी चाहिए। यदि इक्विटी का हिस्सा 60% से नीचे गिर जाए या 70% से ऊपर चला जाए, तो पोर्टफोलियो को फिर से 65% के स्तर पर रीबैलेंस कर लेना चाहिए।