Citi, Nomura, Goldman Sachs और Bernstein ने निफ्टी के टारगेट घटाए हैं। महंगे कच्चे तेल, कमज़ोर कमाई और बढ़ती महंगाई की वजह से भारतीय बाज़ार पर दबाव है।
Will Stock Market go Down: जब दुनिया की चार बड़ी ब्रोकरेज फर्म्स एक साथ किसी मार्केट पर कैंची चलाएं तो समझ लीजिए कि बात सिर्फ सेंटीमेंट की नहीं है। Citi, Nomura, Goldman Sachs और Bernstein, चारों ने भारतीय बाज़ार पर अपना अनुमान घटा दिया है। निफ्टी पहले ही अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से 10 फीसदी से ज़्यादा गिर चुका है और यह गिरावट बढ़ सकती है। इन सबकी चिंता एक ही है। कच्चा तेल महंगा है, भारत ज़्यादातर तेल बाहर से खरीदता है और अगर यही हाल रहा तो कंपनियों की कमाई, महंगाई, ब्याज दरें और रुपया, सब पर मार पड़ेगी।
Citi Research का कहना है कि मध्य-पूर्व में जंग लंबी खिंची तो भारत की ग्रोथ और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ेगा। नया टारगेट 27,000 है जो मौजूदा स्तर से करीब 17 फीसदी ऊपर है। लेकिन वैल्युएशन का जो गुणांक इस्तेमाल होता है, वो भी घटाया गया है, 20 गुना से 19 गुना किया गया है।
नोमुरा ने नया टारगेट 29,300 से घटाकर 24,900 किया है। यह सीधे 15 फीसदी की कटौती है। ब्रोकरेज का कहना है कि अगर तेल के दाम ऊंचे बने रहे, तो FY27 की कमाई के अनुमान में 10 से 15 फीसदी की और कटौती हो सकती है। नोमुरा ने साफ कहा है कि अभी 5 फीसदी की और गिरावट आ सकती है, खासकर मिड और स्मॉल कैप में। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगर उससे ज़्यादा गिरावट आई तो लंबे समय के निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका होगा।
यह सबसे बड़ा झटका है। गोल्डमैन सैश ने भारतीय बाजार की रेटिंग घटाकर 'Marketweight' कर दी है। साथ ही निफ्टी का टारगेट 29,300-29,500 से घटाकर 25,300-25,900 के दायरे में आ गया है। यह करीब 14 फीसदी की कटौती है। गोल्डमैन का अनुमान है कि अगली दो से तीन तिमाहियों में कंपनियों की कमाई के अनुमान और नीचे आएंगे। भारत की अर्निंग ग्रोथ का अनुमान 2026 के लिए 8 फीसदी और 2027 के लिए 13 फीसदी रखा गया है, जो पहले के अनुमान से काफी कम है। गोल्डमैन ने एक और डरावना आंकड़ा दिया है। अगर कच्चा तेल तीन महीने तक 45 डॉलर प्रति बैरल से ज़्यादा बना रहा तो भारत की पूरे साल की अर्निंग ग्रोथ 9 फीसदी तक घट सकती है।
Bernstein का रुख सबसे सतर्क है। उसका निफ्टी टारगेट 26,000 है। लेकिन असली चिंता उसका Bear Case परिदृश्य है। अगर जंग लंबी चली और तेल महंगा रहा तो निफ्टी 20,000 से नीचे जा सकता है, यहां तक कि 19,000 भी छू सकता है। ब्रोकरेज ने एक जरूरी बात कही जो निवेशकों को याद रखनी चाहिए। इस बाजार की गिरावट को सिर्फ डर या सेंटीमेंट की वजह से नहीं मानना चाहिए। असली समस्या कमाई पर असर और खराब होते आर्थिक हालात हैं। ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि महंगाई 6 फीसदी के पार जा सकती है और ब्याज दरों में कटौती दो तिमाही और टल सकती है।