Why Share Market Fall Today: पीएम मोदी की फ्यूल कम खर्च करने की अपील के बाद आज शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ है। वहीं, मिडिल ईस्ट में संकट अभी भी बरकरार है।
Share Market आज जबरदस्त गिरावट के साथ बंद हुआ है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 1.70 फीसदी या 1312 अंक की गिरावट के साथ 76,015 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी आज 1.49 फीसदी या 360 अंक की गिरावट के साथ 23,815 पर बंद हुआ। रियल एस्टेट और सरकारी बैंकों के शेयरों में आज सबसे अधिक गिरावट दर्ज हुई है।
आज सबसे अधिक गिरावट निफ्टी रियल्टी में 3.07 फीसदी दर्ज हुई है। इसके अलावा, निफ्टी पीएसयू बैंक में 2.36 फीसदी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 3.71 फीसदी, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 2.28 फीसदी, निफ्टी ऑटो में 1.85 फीसदी, निफ्टी आईटी में 0.23 फीसदी, निफ्टी मीडिया में 2.52 फीसदी, निफ्टी मेटल में 0.93 फीसदी, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.78 फीसदी और निफ्टी केमिकल्स में 0.78 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। इससे इतर निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर में तेजी दर्ज हुई है।
कुछ जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील का भी बाजार पर असर पड़ा है। वेस्ट एशिया संकट के बीच पीएम मोदी ने लोगों से पेट्रोल, डीजल और गैस जैसी चीजों का सीमित इस्तेमाल करने और एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि बाजार पर ईरान संकट से ज्यादा असर पीएम मोदी की इस अपील का पड़ा है। उनके मुताबिक, जब सरकार लोगों से खर्च कम करने, विदेशी यात्राएं टालने और ईंधन बचाने की बात करती है तो इसका असर आर्थिक गतिविधियों और कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है।
भारतीय शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का दिख रहा है। निवेशकों को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से हालात सामान्य हो सकते हैं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद बाजार का माहौल और बिगड़ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ती है तो अमेरिका ईरान के खिलाफ और कड़े कदम उठा सकता है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी भी बड़ा खतरा बना हुआ है।
3 . कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 4 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है और यह फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल सप्लाई प्रभावित होने की वजह से बाजार में चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 से 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होना देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इससे आयात बिल बढ़ता है और महंगाई पर दबाव आता है।
सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 40 पैसे कमजोर होकर 94.88 पर खुला। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूत मांग की वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों की बिकवाली को और बढ़ा सकता है। इसके अलावा इससे महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों पर दबाव आने की भी आशंका रहती है।
तकनीकी स्तर पर भी बाजार कमजोर दिखाई दे रहा है। निफ्टी 50 इंडेक्स 24,000 के अहम सपोर्ट लेवल से नीचे फिसल गया और 23,900 के नीचे पहुंच गया। एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पलविया के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बचाना बेहद जरूरी है। अगर इंडेक्स 24,340 के ऊपर बंद नहीं होता है तो बाजार में कमजोरी बनी रह सकती है।