US inflation March 2026: ईरान से टकराव के बीच अमेरिका में मार्च में महंगाई 3.3 फीसदी के दो साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई। गैसोलीन 21 फीसदी महंगा हुआ और जीडीपी ग्रोथ 0.5 फीसदी रही, जबकि भारत 7.6 फीसदी की दर से आगे बढ़ रहा है।
Trump economic pressure: ईरान से जारी टकराव के बीच अमेरिका में महंगाई ने दो साल का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया है। मार्च में महंगाई दर 3.3 फीसदी तक पहुंच गई और गैसोलीन की कीमतें 21 फीसदी उछल गईं। यह आंकड़े ऐसे वक्त आए हैं जब मीडटर्म इलेक्शन नजदीक हैं और ट्रंप पहले से ही दबाव में दिख रहे हैं। दूसरी तरफ भारत की अर्थव्यवस्था 7.6 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ रही है।
अमेरिका में महंगाई का यह उछाल सिर्फ एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, यह ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती भी है। मार्च के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर साफ हो जाती है। सभी आइटमों की महंगाई 3.5 फीसदी बढ़ी है, वहीं खाद्य महंगाई में 3.1 फीसदी की तेजी देखी गई है। इसके अलावा ईंधन में 21 फीसदी और डीजल में 45 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। फ्यूल कॉस्ट में इस तेजी ने ट्रांसपोर्ट से लेकर एविएशन तक हर सेक्टर की लागत बढ़ा दी है। इसका सीधा असर आम अमेरिकी की जेब पर पड़ रहा है।
महंगाई में यह उछाल ट्रंप के लिए इसलिए और बड़ा झटका है क्योंकि मीडटर्म इलेक्शनकरीब आ रहे हैं। महंगाई बढ़ने से फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरें घटाना भी मुश्किल हो गया है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो लोन महंगा होता है, कारोबार धीमा पड़ता है और आम आदमी की मुश्किलें बढ़ती हैं। अमेरिकी जीडीपी ग्रोथ का हाल भी बेहतर नहीं है। 2023 में 2.8 फीसदी और 2024 में 2.9 फीसदी रहने के बाद 2025 में यह घटकर 2.1 फीसदी रह गई। मार्च तिमाही में तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था महज 0.5 फीसदी ही बढ़ी।
जहां अमेरिका दबाव में है वहीं भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। वर्ल्ड बैंक ने भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी एडीबी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की ग्रोथ 6.9 फीसदी और वित्त वर्ष 2027 के लिए 7.3 फीसदी रहने का अनुमान दिया है। अमेरिका की 0.5 फीसदी के मुकाबले भारत की 7.6 फीसदी ग्रोथ यह साफ बताती है कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भारत एक मजबूत और स्थिर अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है।