US Iran War: ईरान युद्ध के बीच केंद्र सरकार मुश्किल में फंसी कंपनियों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना पर काम कर रही है। इनके लिए बड़ा राहत पैकेज आ सकता है।
US Iran War: पश्चिम एशिया में जारी संकट से देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा है। जंग के कारण सप्लाई चेन में रुकावट है और गैस की किल्लत से कच्चे माल की कीमतें बढ़ रही हैं। खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात प्रभावित होने से एमएसएमई कंपनियां सबसे ज्यादा संकट में हैं। इस युद्ध के आर्थिक असर को देखते हुए केंद्र सरकार उद्योग जगत के लिए 2.50 लाख करोड़ रुपए की एक नई क्रेडिट गारंटी योजना तैयार कर रही है। यह प्रस्तावित योजना कोरोना काल में लाई गई 'इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) की तर्ज पर तैयार की जा रही है। इस स्कीम का उद्देश्य उन सेक्टर्स को राहत देना है जो मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने उद्योग जगत से संपर्क किया है और उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने को कहा है।
उद्योगों को तात्कालिक राहत की जरूरत है। सरकार अतिरिक्त उपायों पर विचार कर रही है। 3.62 लाख करोड़ का क्रेडिट सपोर्ट महामारी के दौरान दिया गया था। ईसीएलजीएस योजना के तहत 80% से अधिक लोन 8% या इससे कम ब्याज दर पर वितरित किए गए। 92% लोन पर सरकार ने गारंटी दी। योजना के 1.19 करोड़ लाभार्थी रहे। प्रति खाता औसतन 3 लाख रुपये की गारंटी दी गई। बैंकों के लिए अधिकतम ब्याज दर 9.25% सालाना तय की गई थी। 1.8 लाख करोड़ रुपये के ऋण खातों को एनपीए बनने से बचाया गया, इससे 1.35 करोड़ एमएसएमई यूनिट्स टिके रहने में सफल रहीं।
ऑटोमोबाइल: पीएनजी-एलपीजी जो कॉस्टिंग, फोर्जिंग और पेंटिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, उनकी किल्लत से पुणे, नासिक, बेंगलुरु, होसुर, चेन्नई, हरियाणा और लुधियाना में उत्पादन ठप होने का खतरा है।
फार्मा: कच्चे माल, एपीआइ की कीमतों में 15 में 200% से 300% तक की तेज वृद्धि हुई है। पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत इस दौरान 250 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 450 रुपए हो गई है।
एफएमसीजी: कंपनियां लागत में तेज बढ़ोतरी से जूझ रही हैं। मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पैकेजिंग का हिस्सा 15% तक है। कच्चे तेल से जुड़े पदार्थ जैसे पेट रेजिन, एचडीपीई, विशेष लैमिनेट्स की कीमतों में 50% तक की वृद्धि हुई है।
इस स्कीम को वित्त मंत्रालय का डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज अंतिम रूप दे रहा है और अगले 15 दिन के भीतर इसे लागू किया जा सकता है। यह योजना उन कंपनियों को राहत देगी, जो ऊंचे इनपुट लागत, लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी से प्रभावित हैं। इस योजना का मुख्य फोकस माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) पर रहेगा। स्कीम के तहत बिना गारंटी लोन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिन्हें सरकार की गारंटी मिलेगी। इससे छोटे कारोबारों को आसानी से फंडिंग मिल सकेगी, लिक्विडिटी की समस्या से राहत मिलेगी। सरकार ने युद्ध के आर्थिक प्रभाव का आकलन करने के लिए भी अभ्यास शुरू कर दिया है।
अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल अर्थव्यवस्था पर कोई तात्कालिक सिस्टमेटिक दबाव नहीं है। लेकिन हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है। यह कदम एक प्रिकॉशनरी कुशन के रूप में देखा जा रहा है। ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित सेक्टर्स को तुरंत सहारा दिया जा सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भले ही आने वाले समय में भू- राजनीतिक तनाव कम हो जाए, लेकिन प्रभावित सेक्टर्स में रिकवरी आने में समय लग सकता है। सप्लाई चेन में रुकावट और डिमांड में अनिश्चितता इसके प्रमुख कारण हैं। सरकार कोविड-19 के दौरान लागू मॉडल को अपनाते हुए मौजूदा संकट से निपटने की रणनीति बना रही है, ताकि आर्थिक गतिविधियों पर ज्यादा असर न पड़े।