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PM Modi ने क्यों की 1 साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील? जानिए कैसे इकोनॉमी को नुकसान पहुंचा रहा गोल्ड

Gold Import: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना न खरीदने की अपील सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंता का संकेत है। बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट से रुपये, विदेशी मुद्रा भंडार और महंगाई पर दबाव बढ़ने का खतरा है।
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May 11, 2026
PM Modi Gold Appeal
पीएम ने लोगों से सोना न खरीदने की अपील की है। (PC: AI)

PM Modi Gold Appeal: भारत में शादी-ब्याह और सोना, दोनों का रिश्ता पुराना है। घर में शादी हो और गोल्ड की खरीदारी न हो, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक शादी के लिए भी सोना न खरीदने की अपील कर दी। सुनने में यह बात भले चौंकाने वाली लगे, लेकिन इसके पीछे की वजह सीधे देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी है।

रुपये और आयात बिल पर दबाव

असल चिंता मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और महंगे होते कच्चे तेल को लेकर है। हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 126 डॉलर तक पहुंच गई है। इससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है। ऊपर से रुपये पर दबाव अलग बढ़ता जा रहा है।

सोना और महंगा तेल दोनों इकोनॉमी पर बना रहे दबाव

सरकार की परेशानी यह है कि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से खरीदता है। यही हाल सोने का भी है। देश में जितना सोना इस्तेमाल होता है, उसका बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है और दोनों चीजों के लिए भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। ऐसे में जब तेल भी महंगा हो और लोग जमकर सोना भी खरीदें, तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है। इसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है।

भारत कितना सोना करता है आयात

हमारा देश सोने का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। हम अपनी जरूरत का 90 फीसदी से ज्यादा सोना दूसरे देशों से मंगवाते हैं। भारत में करीब 800 टन सालाना सोने की खपत है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोने का आयात 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इससे एक साल पहले यह 58 अरब डॉलर पर था। यानी सोने के आयात में 24 फीसदी का बड़ा उछाल आया है। देश के कुल आयात बिल में सोने की हिस्सेदारी करीब 9 फीसदी है। यह क्रूड ऑयल के बाद देश का सबसे बड़ा आयात बिल होता है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में काफी गिरावट आई है। 1 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 अरब डॉलर घटकर 690.693 अरब डॉलर रह गया था। इससे एक हफ्ते पहले विदेशी मुद्रा भंडार में 4.82 अरब डॉलर की कमी हुई थी। अगर विदेशी मुद्रा भंडार कम होगा तो रुपये की गिरावट को रोकने और कच्चे तेल समेत दूसरी कई जरूरी चीजों को खरीदने के लिए पैसा नहीं बचेगा।

विदेशी मुद्रा बचाना जरूरी

यही वजह है कि पीएम मोदी लगातार पेट्रोल-डीजल बचाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में ईंधन बेहद महंगा हो चुका है और विदेशी मुद्रा बचाना अब देश की जरूरत बन गया है। इसी दौरान उन्होंने लोगों से सोने की खरीदारी कुछ समय के लिए टालने की भी अपील कर दी।

सोने से काफी जरूरी है तेल

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, सोना आम जरूरत की चीज नहीं माना जाता। तेल की जरूरत हर दिन पड़ती है, लेकिन गोल्ड को निवेश और बचत के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में जब वैश्विक संकट के समय लोग बड़ी मात्रा में सोना खरीदते हैं, तो देश से ज्यादा डॉलर बाहर जाते हैं। इससे चालू खाता घाटा बढ़ता है और रुपया कमजोर होने लगता है।

डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड लो पर है रुपया

भारत पहले भी ऐसे हालात देख चुका है। जब-जब तेल की कीमतें बढ़ीं या विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव आया, तब सरकारों ने गोल्ड इंपोर्ट कम करने के कदम उठाए। कभी सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई गई, तो कभी लोगों को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। मकसद सिर्फ एक था, डॉलर की बचत। इस बार मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि मिडिल ईस्ट संकट अभी थमता नहीं दिख रहा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव बना हुआ है और दुनिया को डर है कि तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसका असर उभरते बाजारों की करेंसी पर भी दिख रहा है। रुपया हाल में डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुका है।

अगर आने वाले महीनों में तेल और महंगा हुआ और दूसरी तरफ गोल्ड इंपोर्ट भी बढ़ गया, तो महंगाई और बढ़ सकती है। कमजोर रुपया विदेश से आने वाली हर चीज को महंगा कर देता है। मतलब तेल, सोना और बाकी आयातित सामान सबकी कीमत बढ़ सकती है। आम आदमी की जेब पर भी असर पड़ना तय है।

आने वाला समय नहीं होगा आसान

पीएम मोदी का संदेश सिर्फ सोना न खरीदने तक सीमित नहीं था। उन्होंने लोगों से गैरजरूरी यात्रा कम करने, जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम अपनाने और ईंधन का इस्तेमाल सोच-समझकर करने की भी अपील की। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार आने वाले समय को आसान नहीं मान रही और लोगों को अभी से बचत की आदत डालने को कह रही है।

Updated on:
11 May 2026 01:31 pm
Published on:
11 May 2026 01:30 pm
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