मारुति की बादशाहत रहेगी कायम डीजल कार न बनाने से नहीं पड़ेगा फर्क इस सेगमेंट पर फोकस करेगी कंपनी
नई दिल्ली: देश की नंबर 1 कार कंपनी मारुति सुजुकी ने 2020 से डीजल कारें न बनाने का फैसला किया है। कंपनी के इस फैसले के बाद ऑटोमोबाइल सेक्टर में मारुति और डीजल कारों के वजूद को लेकर बहस तेज हो गई है। दरअसल मारुति का डीजल कार सेगमेंट में दबदबा था अब जबकि कंपनी ने इनका प्रोडक्शन बंद करने का फैसला किया है। इसके बाद कंपनी का नंबर वन का टाइटल भी खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। हमने मारुति के इस फैसले का कंपनी और पूरी इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा इसके बारे में एक्सपर्ट्स से बात की उनकी क्या राय है ये बताने से पहले हम आपको बताते हैं कि आखिर मारुति नंबर वन क्यों है।
मारुति के इस डिसीजन के बाद सबसे पहले सवाल ये आता है कि मारुति के इस डिसीजन का मतलब क्या है? क्या भविष्य में डीजल कारें दिखनी बंद हो जाएंगी अगर ऐसा होगा तो डीजल कारों की जगह कौन सी कारें लेंगी । दरअसल मारुति सुजुकी के डिसीजन के अलाव कई कारण है जिसकी वजह से डीजल कारों से लोगों का मोहभंग हो रहा था । लेकिन मारुति के फैसले के बाद माना जा रहा है कि छोटी कारों में डीजल कारों का दौर खत्म हो जाएगा
इन वजहों से खत्म हो जाएगा डीजल कारों का दौरा-
बाकी कंपनियां भी बंद कर सकती है डीजल कारें-
जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि डीजल कारें बनाना आज की तारीख में फायदेमंद नहीं रहा है। यही वजह है कि कंपनियां डीजल की जगह इलेक्ट्रिक और सीएनजी गाड़ियों पर फोकस कर रही है। हुंडई और किया जैसी कंपनियों ने तो इस साल इलेक्ट्रिक कार लॉन्च करने की घोषणा पहले ही कह दी है। खबरों की मानें तो मारुति की ही तरह हुंडई और किया भी डीजल कारों के प्रोडक्शन बंद करने की घोषणा कर सकती है। लेकिन अभी तक इस बात पर किसी भी कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इलेक्ट्रिक और सीएनजी लेंगी डीजल कारों की जगह-
इलेक्ट्रिक कारों को फ्यूचर व्हीकल माना जा रहा है। मारुति अपनी सस्ती और पापुलर कार वैगन आर का इलेक्ट्रिक वर्जन लाने वाली है। लेकिन इलेक्ट्रिक कारों को बनाने से पहले कंपनी कस्टमर्स को भरोसा दिलाना चाहती है यही वजह है कि मारुति इलेक्ट्रिक कारों के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर काम कर रही है। गुजरात में कंपनी ने ऑलरेडी चार्जिंग स्टेशन पर काम शुरू कर दिया है ताकि लोगों को इलेक्ट्रिक कारों की चार्जिंग में असुविधा न हो। इसके अलावा रेनॉ भी आम आदमी के लिए सस्ती इलेक्ट्रिक क्विड पर काम कर रही है। यानि हम कह सकते हैं इलेक्ट्रिक कारें डीजल कारों की जगह ले लेंगी।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स-
ऑटो एक्सपर्ट टुटू धवन का साफ कहना है कि '"मारुति अपने इस डिसीजन की वजह से न तो नंबर वन का टाइटल खोएगी औऱ न ही उसे कोई नुकसान होगा। उनकरे मुताबिक डीजल कारों को फेजआउट कर कंपनी इलेक्ट्रिक और पेट्रोल व्हीकल्स को कंपटीटव बनाने पर काम करेगी। बल्कि अगर कहा जाए कि कंपनी ने काम करना शुरू कर दिया है तो गलत नहीं होगा।"
लेकिन डीजल कारों के खत्म होते दौर पर उन्होने भी माना कि हां ये खत्म होने वाला है।
आपको बता दें कि IHS मार्किट के डाटा के मुताबिक, डीजल व्हीकल प्रोडक्शन स्लो होने के बावजूद 2019 में मारुति सुजुकी की बिक्री लगभग 20 लाख यूनिट और 2020 में मामूली गिरावट के साथ 19.5 लाख रहने की उम्मीद है। वहीं 2021 में यह आंकड़ा बढ़ोत्तरी के साथ 22 लाख और 2022 में 23 लाख रहने का अनुमान है। यानि मारुति का नंबर वन टाइटल बरकरार रहेगा।
वहीं रंजॉय मुखर्जी ने इलेक्ट्रिक कारों को फ्यूचर व्हीकल तो माना लेकिन डीजल कारों के खत्म होते दौर पर उनका कहना था कि छोटी कारों में तो ये खत्म हो जाएगा लेकिन बड़ी suv और mpv सेगमेंट में डीजल कारें मिलती रहेंगी। लेकिन हां अब कंपनियां इलेक्ट्रिक कारों पर फोकस करेंगी।