Automobile Sector में चल रहा है मंदी का दौर नीति आयोग ने दिया था सरकार को प्रस्ताव डीजल पेट्रोल वाहन बैन करने का दिया था सुझाव
नई दिल्ली: हमारा ऑटोमोबाइल सेक्टर पिछले दो दशकों की सबसे बड़ी मंदी झेल रहा है। मंदी के बीच में ही हाल के दिनों में खबर आई थी कि सरकार देश में प्रदूषण कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल कारों पर रोक लगाने पर विचार कर रही है और उनके विकल्प के तौर पर इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा दिया जाएगा। लेकिन अब सरकार ने अपना मन बदल लिया है और अब पेट्रोल-डीजल कारों को देश में बैन नहीं किया जाएगा। सरकार के इस फैसले से ऑटोमोबाइल कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को प्रोमोट करने के लिए सकारात्मक पहल कर रही है लेकिन डीजल और पेट्रोल इंजन वाली गाड़ियों को बैन करने या EV (इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल) को सड़कों पर लाने के लिए अभी कोई डेडलाइन तय नहीं की गई है। नितिन गडकरी के इस बयान से एक बात तो साफ़ हो गई है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल गाड़ियां भारतीय सड़कों चलती रहेंगी।
आपको बता दें कि पेट्रोल-डीजल वाहनों पर रोक लगाने का सुझाव नीति आयोग की तरफ से सरकार को दिया गया था जिसके बाद सरकार की तरफ से इसपर विचार किया गया। कुछ दिनों पहले नीति आयोग की ड्राफ्ट गाइड लाइंस में डीजल और पेट्रोल वाहनों को हटाने के लिए एक समय सीमा तय करने की बात कही गई थी। नीति आयोग के प्रस्ताव में साल 2023 तक सभी थ्री-व्हीलर्स और 2025 तक 150cc से कम क्षमता के टू-व्हीलर्स को बैन करने का सुझाव दिया था। आयोग ने वाहन निर्माताओं से गाड़ियों की विभिन्न कैटिगरी को इलेक्ट्रिक गाड़ियों से बदलने के लिए प्लान लाने को कहा था और इसके नीति आयोग के चीफ एग्जिक्युटिव अमिताभ कांत की अगुवाई वाली कमिटी ने वाहन निर्माताओं को समय सीमा दी थी।