पिछले साल पर गौर किया जाए, तो एसयूवी गाड़ियों ने डीज़ल वाहनों की डिमांड को मज़बूती दी। और अगर रिपोर्ट की मानी जाए, तो इस साल भी यह ट्रेंड बरकरार रहेगा।
पिछले साल यानि की 2021 की बात करें, तो डीज़ल की बढ़ती कीमत के बावजूद भी इसकी गाड़ियों की डिमांड में, ज़्यादा कमी देखने को नहीं मिली। डीज़ल वाहनों की डिमांड को मज़बूती देने और इसे बरकरार रखने में सबसे बड़ा योगदान है एसयूवी गाड़ियों का। भारत में पिछले कुछ सालों में एसयूवी मार्केट तेज़ी से बढ़ा है। ऐसे में एसयूवी गाड़ियों की इस लोकप्रियता से 2021 में डीज़ल वाहन सेगमेंट की डिमांड में मज़बूती बनी रही है।
कुछ बड़ी कंपनियों ने छोड़ा साथ
मारुति सुज़ुकी (Maruti Suzuki) ने पिछले साल से डीज़ल इंजन सेक्टर को छोड़ने का फैसला लिया। इतना ही नहीं, टाटा मोटर्स (Tata Motors) ने भी 2020 में छोटी क्षमता वाली गाड़ियों में डीज़ल इंजन का इस्तेमाल करना बंद कर दिया। इसके बावजूद भी 2021 में डीज़ल वाहनों की डिमांड में कमी देखने को नहीं मिली।
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डीज़ल वाहनों की डिमांड के बने रहने का कारण
EY India के ऑटोमोटिव सेक्टर के पार्टनर सोम कपूर ने बताया कि समान्य तौर पर ज़्यादातर लोग एसयूवी गाड़ियां खरीदते समय डीज़ल ऑप्शन चुनना पसंद करते हैं। इसकी वजह है डीज़ल वैरिएंट का गाड़ी को ज़्यादा टॉर्क और पावर देना। सोम कपूर का यह भी कहना है कि किसी गाड़ी की कीमत जितनी ज़्यादा होगी, उसके डीज़ल वैरिएंट की डिमांड भी उतनी ही ज़्यादा होगी। ऐसे में डीज़ल वाहनों की डिमांड बनी रहती है।
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इस साल क्या रहेगा हाल?
पिछले साल के मार्केट रिकॉर्ड को देखा जाए तो इस बात की पूरी संभावना है कि 2021 का ट्रेंड 2022 में भी बरकरार रहेगा। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि 2022 में भी एसयूवी गाड़ियां डीज़ल वाहनों की डिमांड को बनाए रखेगी।