1930 के दशक में लॉन्च हुई फॉक्सवैगन की बीटल ( volkswagen beetle ) को कंपनी ने बंद करने का फैसला किया है। अपने जमाने की ऑईकॉनिक कार बीटल का सफर 80 साल के बाद थम जाएगा।
नई दिल्ली: लगभग 8 दशकों से दुनिया भर की सड़कों पर रफ्तार भरने वाली Volkswagen Beetle की रफ्तार अब थम जाएगी। दरअसल कंपनी ने अब इस कार के प्रोडक्शन को बंद करने का फैसला किया है। बुधवार को इस कार ( car ) की आखिरी यूनिट के प्रोडक्शन के साथ ही इस कार के पोरडक्शन को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है।
म्यूजियम में रखी जाएगी आखिरी यूनिट-
बुधवार को डेनिम ब्लू कलर की जो आखिरी यूनिट बनी है कंपनी उसे बेचेगी नहीं बल्कि बल्कि इसे मैक्सिको के पैब्ला में फॉक्सवैगन के लोकल म्यूजियम में रखा जाएगा।
कई बार हुए हैं बदलाव-
1930 के दशक में सबसे पहले इस कार को लॉन्च किया गया था। वहीं 1998 में इस कंपनी ने नई यानी सेकंड जनरेशन बीटल को लॉन्च किया । तब से लेकर अब तक इस कार को कई कलर्स और वेरिएंट में बदलाव के साथ बेचा गया है। इसके बाद साल 2011 में फोक्सवैगन ने थर्ड यानी वर्तमान जनरेशन बीटल लॉन्च की। फर्स्ट जनरेशन में जहां इस कार की पूरी दुनिया में लगभग 2.15 करोड़ यूनिट्स बिकीं वहीं सेकेंड जनरेशन बीटल कार की 1998 से 2010 के बीच 12 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिकीं और 2011 में लॉन्च हुई थर्ड जनरेशन बीटल अभी तक 5 लाख से ज्यादा बनाई जा चुकी है।
| Beetle कारों की जनरेशन | Beetle कारों की बिक्री |
| 1st जनरेशन ( 1930- 1998 ) | 2.15 करोड़ यूनिट्स |
| 2nd जनरेशन ( 1998-2010 ) | 12 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिकीं |
| 3rd जनरेशन ( 2011- 2019 ) | 5 लाख से ज्यादा |
सेकंड और थर्ड जनरेशन बीटल कारें 23 एक्सटीरियर कलर, 32 तरह के इंटीरियर, 13 अलग-अलग इंजन कॉन्फिगरेशन और 19 स्पेशल एडिशन में बाजार में उतारी गई है। इन्हें दुनिया भर के 91 मार्केट्स में बेचा गया है।