चंदौली

समाजवादी पार्टी की बड़ी हार, उपचुनाव में मिले महज 19 वोट, BJP जीती बरहनी उपचुनाव

सपा के कब्जे वाली यह सीट बीजेपी के लिये थी प्रतिष्ठा का सवाल।
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Updated: 15 Sep 2018, 10:22 PM IST
Chandauli Barahani By Election
चंदौली बरहनी उपचुनाव

चंदौली . 2019 के पहले भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा के उपचुनाव में गोरखपुर, फूलपुर और कैराना सीट से हाथ धोना पड़ा तो इसे उसकी गिरती लेाकप्रियता से जोड़कर भी देखा गया। इसके बाद कई छोटे-छोटे चुनावों में भी पार्टियां केवल बीजेपी के हराने के लिये एक हुईं और उनका मकसद सफल भी हुआ। पर चंदौली के बरहनी में हुए उपचुनाव में ऐसा नहीं हो पाया। यहां समाजवादी पार्टी को बुरी हार का सामना करना पड़ा और बीजेपी बाजी मार ले गयी। बीजेपी समर्थित प्रत्याशी गुड्डू गुप्ता ने यहां सफलता का झंडा गाड़ा। उनकी जीत के बाद समर्थकों की खुशी देखने लायक थी। यह सीट बीजेपी के लिये बेहद अहम और उसकी साख से जुड़ी बतायी जाती रही है।

बरहनी ब्लाक प्रमुख पद के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा समर्थित गुड्डू गुप्ता ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा समर्थित संजय को 40 वोटों से हरा कर यह प्रतिष्ठापरक सीट जीत ली। 91 में से 85 क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया, जिसमें सात मत अवैध पाए गए। गुड्डू गुप्ता को 59 जबकि संजय को महज 19 वोट ही मिले। गुड्डू गुप्ता की जीत की घोषणा होते ही समर्थको ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया। कलेक्ट्रेट में जिला निर्वाचन अधिकारी जिलाधिकारी ने उनहें जीत का प्रमाण पत्र दिया।

चुनाव और मतगणना के दौरान पूरा ब्लॉक कार्यालय व जीटी रोड पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ठीक 11 बजे मतदान शुरू हो गया। पहले एक घंटे तक कोई मतदाता नहीं पहुंचा। 12 बजे अपने समर्थक सदस्यों के साथ गुड्डू गुप्ता पहुंचे। जांच पड़ताल के बाद सभी ने अन्दर जाकर अपना वोट दिया। लगभग डेढ़ बजे संजय अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और वोटिंग की। दो बजे तक 85 सदस्य वोटिंग कर चुके थे। पर सदस्य संख्या 91 होने के चलते चुनाव अधिकारियों को समय सीमा तीन बजे तक बचे हुए सदस्यों का इंतजार करना पड़ा। अंतिम समय तक छह सदस्य नहीं आए। तीन बजते ही दोनों प्रतयाशियों की मौजूदगी में वोटों की गिनती शुरू की गयी, जिसमें गुड्डू जीत गए।

बताते चलें कि 2015 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चंदौली के बरहनी ब्लाक से तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष बलिराम यादव के भाई रामानंद यादव ने ब्लॉक प्रमुख के पद पर कब्जा किया था। सूबे में सरकार बदलने के बाद अविश्वास प्रस्ताव का दौर चला और बरहनी ब्लाक प्रमुख की कुर्सी भी इसका शिकार हो गई।

By Santosh Jaiswal

Updated on:
15 Sep 2018, 10:22 PM IST
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