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भाजपा के खिलाफ साम्प्रदायिकता के आरोप से निपटेगा अकाली दल

अकाली दल नेताओं की राय में पार्टी भाजपा के खिलाफ साम्प्रदायिकता के आरोप को बेअसर करने में सक्षम है। इसका कारण यह है कि अकाली दल एनडीए का संस्थापक सदस्य है और भाजपा का पुराना सहयोगी है...
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Updated: 13 Aug 2018, 8:49 PM IST
akali dal and bjp
akali dal and bjp

(चंडीगढ): पंजाब में शिरोमणि अकाली दल ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति तय की है। इसके तहत जहां पार्टी केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के विकास और किसानों के हित में किए गए कामों को आम लोगों के बीच में रखेगी वहीं अपने सहयोगी दल भाजपा पर लगाए जाने वाले साम्प्रदायिकता के आरोप से भी निपटेगी।

अकाली दल की ओर से विपक्ष और खासकर कांग्रेस द्वारा भाजपा पर लगाए जाने वाले साम्प्रदायिक होने के आरोप को चुनाव अभियान में नाकाम किए जाने का प्रयास होगा। अकाली दल और भाजपा के नेतृत्व के बीच इस रणनीति पर मंथन किया जा चुका है। अकाली दल के नेताओं का मानना है कि पंजाब में विपक्ष के पास केन्द्र में सत्तारूढ एनडीए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ उठाने के लिए कोई मुद्दा नहीं है। अकाली दल नेताओं की राय में पार्टी भाजपा के खिलाफ साम्प्रदायिकता के आरोप को बेअसर करने में सक्षम है। इसका कारण यह है कि अकाली दल एनडीए का संस्थापक सदस्य है और भाजपा का पुराना सहयोगी है।


अकाली दल किसान और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को जनता के बीच रखेगा। खरीफ फसलों के लिए घोषित समर्थन मूल्य और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसे कदमों को आम लोगों के बीच रखा जाएगा। पंजाब के किसानों को इन कदमों से बहुत लाभ हुआ है।

दूसरी ओर पंजाब में मौजूदा कांग्रेस सरकार द्वारा किसानों के पूरे कर्ज माफ करने के वायदे को पूरा न करने का मुद्दा भी उठाया जाएगा। यूपीए सरकार के दौरान कृषक समुदाय और कृषि क्षेत्र की उपेक्षा को भी मुद्दा बनाया जाएगा। इसके साथ ही आर्थिक क्षेत्र में मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को भी मुद्दा बनाया जाएगा। वित्तीय क्षेत्र को युक्ति संगत बनाने के लिए उठाए गए कदमों और ईज आॅफ डूइंग बिजनेस के मुद्दे पर किए गए बेहतर काम को भी जनता के बीच रखा जाएगा। मोदी सरकार के इन कदमों से सीधा विदेशी निवेश बढा है। एनआरआई की स्वदेश यात्राओं की प्रक्रिया को आसान बनाए जाने के कदमों की भी अकाली दल ने सराहना की है।

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