चंडीगढ़ पंजाब

पंजाब में फिर बन सकता है अकाली-भाजपा गठबंधन? 2027 चुनाव से पहले बिक्रम मजीठिया का बड़ा बयान

Akali Dal BJP alliance Punjab 2027: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के गठबंधन की अटकलें तेज। बिक्रम मजीठिया ने कहा- पंजाब की जनता दोनों दलों को फिर साथ देखना चाहती है।
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Updated: 21 Aug 2026, 3:46 PM IST
Akali Dal BJP alliance Punjab 2027
2027 चुनाव से पहले बिक्रम मजीठिया का बड़ा बयान, फोटो सोर्स- ANI

Vikram Majithia statement Akali BJP alliance: पंजाब की सियासत में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बड़े राजनीतिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। दरअसल, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के फिर से एक साथ आने के कयास लगाए जा रहे हैं। अकाली दल के दिग्गज नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने संकेत दिए हैं कि राज्य के लोग दोनों पुराने सहयोगियों को एक बार फिर से हाथ मिलाते देखना चाहते हैं।

'पंजाब का भाईचारा और विकास चाहता है दोनों का साथ'

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने दोनों पार्टियों के ऐतिहासिक रिश्तों का जिक्र किया। अकाली दल और भाजपा का गठबंधन बेहद पुराना और मजबूत रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और दिवंगत प्रकाश सिंह बादल जी ने इस रिश्ते की नींव रखी थी, जिसे आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भी कायम रखा गया। भले ही कृषि कानूनों के समय विचार अलग हो गए थे, लेकिन पंजाब के सामाजिक ताने-बाने, शांति, आपसी सौहार्द और सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जनता की यही इच्छा है कि दोनों दल फिर एक हों। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय दोनों पार्टियों का हाईकमान ही करेगा।

हरसिमरत कौर और सुखबीर बादल के कदमों से भी मिले संकेत

मजीठिया के बयान से पहले भी अकाली दल के कई वरिष्ठ नेताओं के बयानों से बीजेपी के साथ दोबारा नजदीकी बढ़ने के संकेत मिल चुके हैं। बठिंडा से अकाली सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा था कि पंजाब की तरक्की और विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर काम करना जरूरी है। वहीं, हाल ही में अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद दोनों दलों के बीच एक बार फिर गठबंधन होने की अटकलों को और बल मिला है।

2020 में खत्म हुई थी 22 साल पुरानी साझेदारी

अकाली दल और भाजपा के बीच यह गठबंधन 1998 में बना था, जब अकाली दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बना। इस जोड़ी ने 2007 से 2017 तक लगातार 10 साल पंजाब में शासन किया। हालांकि, साल 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन विवादित कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने एनडीए से अपना 22 साल पुराना नाता तोड़ लिया था और हरसिमरत कौर ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में 2021 में केंद्र सरकार ने इन कानूनों को निरस्त कर दिया था। अब 2027 के चुनावी समीकरणों को देखते हुए दोनों दल एक बार फिर पुरानी कड़वाहट भुलाकर साथ आने की संभावना तलाश रहे हैं।

Updated on:
21 Aug 2026, 3:46 PM IST
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