चंडीगढ। पंजाब की अमृतसर,पटियाला और नाभा जैसी कडी सुरक्षा वाली जेलों से लश्कर ए तैयबा के आतंककारी भी अपने पाकिस्तान स्थित आकाओं से बात करने में सफल हुए है।
चंडीगढ। पंजाब की अमृतसर,पटियाला और नाभा जैसी कडी सुरक्षा वाली जेलों से लश्कर ए तैयबा के आतंककारी भी अपने पाकिस्तान स्थित आकाओं से बात करने में सफल हुए है। जांच में यह बात साबित हुई है कि आतंककारियों ने प्रदेश की जेलों से पाकिस्तान बात की है। अब राज्य सरकारआतंककारियों को फोन मुहैया कराने वाले 14 जेल अफसरों पर कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।
एफआईआर दर्ज होगी
लश्कर ए तैयबा के आतंककारी अमृतसर,पटियाला ओर नाभा की जेलों में कैद हैं। इन जेलों में अपनी नियुक्ति के दौरान प्रथम दृृष्टया लापरवाही के दोषी पाए गए अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए जेल विभाग ने मई माह में ही राज्य सरकार को लिखा है। इन 14 अफसरों में एक डीआईजी भी शामिल है। जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा कह चुके हैं कि जेल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल की छूट देने वाले अफसर के खिलाफ सीधी एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।
चार्ज शीट जारी करने का फैसला
लश्कर ए तैयबा के आतंककारियों को जेलों से पाकिस्तान स्थित आकाओं से बात करने की सुविधा देने से सम्बन्धित इस मामले में पंजाब सिविल सेवा दण्ड और अपील नियम 1970 की धारा 10 के तहत दोषी जेल अफसरों को चार्जशीट जारी करने का फैसला किया है। आईजी जेल रूप कुमार अरोरा द्वारा की गई प्रारम्भिक जांच में 14 जेल अफसरों को इन तीन जेलों पर वर्ष 2009 से 2011 के दौरान नियुक्ति के समय लश्कर ए तैयबा के आतंककारियों को पाकिस्तान बात करने के लिए फोन की सुविधा मुहैया कराने का दोषी पाया गया था।
दो आतंकी पंजाब की जेलों में
न्यायालय ने लश्कर ए तैयबा के आठ आतंककारियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इनमें से दो पंजाब की जेलों में रहे हैं। वर्ष 2009 में पटियाला जेल में आतंककारी मोहम्मद इकबाल रहा था। तब डीआईजी लखमिंदर सिंह जाखड पटियाला जेल के अधीक्षक थे। अन्य दोषी पाए गए जेल अफसरों में सेवारत जेल अधीक्षक सुखविंदर सिंह,मनजीत सिंह ,गुरपाल सिंह सरोया,जीवन कुमार गर्ग,सेवानिवृत जेल अधीक्षक प्रेम सागर शर्मा,जेपी सिंह,गुरशरण सिंह सिद्धू,बलबीर सिंह बिसला,दिवंगत उपअधीक्षक चरणजीत सिंह भंगू शामिल हैं। पुलिस महानिदेशक जेल आईपीएस सहोता के अनुसार इन अफसरों को अब चार्जशीट पर जवाब देने का मौका दिया जाएगा। विस्तृत जांच और जिम्मेदारी तय करने के लिए एक जांच अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। जवाब मिलने के बाद कार्रवाई शुरू की जाएगी।