
राजेंद्र सिंह जादौन की रिपोर्ट...
(चंडीगढ): पंजाब में नशे की लत के कारण आए दिन हो रही नौजवानों की मौत से आहत प्रदेश के साहित्यकार और जागरूक नागरिक सवाल लेकर खडे हो गए हैं। वे राजनीतिक दलों से पूछ रहे हैं कि ड्रग जब राजनीतिक मुद्दा बनाया जाता रहा है तो इसका खात्मा क्यों नहीं किया जा रहा है।
पटियाला टीम का गठन
इन साहित्यकारों,पत्रकारों,वकीलों और जागरूक नागरिकों ने सरकार और समाज को ड्रग के विरोध में जगाने के लिए पटियाला टीम के नाम से एक मोर्चा तैयार किया है। इसको गैर राजनीतिक मंच कहा जा रहा है। पटियाला टीम ड्रग और इसकी लत के खिलाफ आगामी एक जुलाई से सात जुलाई तक काला सप्ताह मनाने जा रही है। इस दौरान सभी नागरिकों से अपील की जाएगी कि वे नशे के खिलाफ काली पट्टी बांधे या काले कपडे पहनें।
जड से खत्म हो नशे की समस्या
पटियाला टीम में शामिल साहित्यकार सरदारा सिंह चौहान कहते हैं कि हमारा सम्बन्ध किसी राजनीतिक दल से नहीं है और न ही हम किसी राजनीतिक दल का विरोध कर रहे हैं। हम सीधे सरकार से सवाल कर रहे हैं कि आखिर पंजाब से नशे की समस्या की जडें क्यों खत्म नहीं हो पा रही। सभी कहते हैं कि ड्रग बेचने वालों के बारे में जानकारी दो। आखिर प्रदेश के युवाओं को ड्रग आसानी से मिल रही है और वे अपना जीवन गंवा रहे हैं फिर भी पूछा जा रहा है कि ड्रग कहां मिल रही है।
पुलिस की गिरफ्त से दूर ड्रग तस्कर
टीम के सदस्यों ने मीडिया से बातचीत में प्रदेश के ड्रग संकट पर अपनी-अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि ड्रग सेवन करने वाले की मौत पर कहा जा रहा है कि वह ओवर डोज से मारा गया। वावस्त में मौत ओवरडोज से नहीं डोज से ही हो रही है। डोज के कारण होने वाली मौत को हत्या का मामला माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि ड्रग बेचने वाले 18 हजार लोग जेलों में बंद कर दिए गए हैं। ये 18 हजार लोग ड्रग तस्कर नहीं है। ये नशे की लत के शिकार लोग हैं। ड्रग तस्कर तो पुलिस की गिरफ्त में नहीं आए।
पीड़ित परिवारों को मिले मुआवजा
सरदारा सिंह ने कहा कि सरकार को अपनी भूमिका निभाते हुए प्रदेश को नशा मुक्त करना चाहिए। उन्होंने राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सीमा खुली है लेकिन ड्रग तस्करी सबसे ज्यादा पंजाब की ओर होती है। इसका कारण यह है कि पंजाब में ड्रग की खपत है। उन्होंने कहा कि सरकार को ड्रग के सेवन से होने वाली मौतों के से प्रभावित परिवारों को आर्थिक मुआवजा देना चाहिए। पटियाला टीम में इसी तरह प्रभावित महिला कश्मीर कौर भी मौजूद थीं। कश्मीर कौर के करीब 22 वर्षीय पुत्र बलविंदर सिंह की मृृत्यु ड्रग के सेवन से हो गई थी। कश्मीर कौर ने कहा कि उन्होंने तो अपना पुत्र खो दिया लेकिन वे चाहती हैं कि दूसरी माताओं के पुत्र बचे रहे।