
LPU Violence:लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में 26-27 सितंबर की रात हुई कथित हिंसा के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अब तक की पुलिस कार्रवाई और जांच की स्थिति की जानकारी मांगी।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने पुलिस से यह भी बताने को कहा कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है और जिस घटना का याचिका में जिक्र किया गया है, वह वास्तव में हुई थी या नहीं।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता चंचल सिंगला ने कोर्ट को बताया कि मामले में FIR दर्ज की गई हैं और पुलिस जांच कर रही है। वहीं, LPU के एक छात्र ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कैंपस में हुई हिंसा की जांच CBI को सौंपने और इसकी निगरानी हाईकोर्ट से कराने की मांग की है। याचिका के अनुसार, हिंसा 26 सितंबर की रात शुरू हुई थी और याचिकाकर्ता का दावा है कि स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
याचिका में दावा किया गया है कि 26 सितंबर की रात Reddit पर एक अपुष्ट पोस्ट वायरल हुई। इसमें कथित तौर पर दावा किया गया था कि कैंपस में एक कर्मचारी ने छात्रा के साथ दुष्कर्म किया, जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने उसे घर भेज दिया और बाद में उसने आत्महत्या कर ली। इस पोस्ट और WhatsApp पर प्रसारित संदेशों के बाद करीब 2,000 छात्र हॉस्टल GH-3 के बाहर जमा हो गए। याचिका के मुताबिक, रात करीब 2 बजे छात्रों के एक समूह ने फगवाड़ा और जालंधर के बीच नेशनल हाईवे-44 को भी जाम कर दिया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि रात से अगले दिन तक छात्रों और कुछ बाहरी लोगों ने यूनिवर्सिटी की कई इमारतों में आगजनी की। इसके अलावा दरवाजे, कांच के पैनल और टर्नस्टाइल गेट तोड़ने, इमारतों में घुसने और सामान लूटने के आरोप भी लगाए गए हैं। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि भीड़ को शांत करने की कोशिश कर रहे कुछ कर्मचारियों पर हमला किया गया। CCTV कैमरे, कंप्यूटर, UPS, LED स्क्रीन, टर्नस्टाइल गेट, बूम बैरियर और सुरक्षा कार्यालयों को नुकसान पहुंचाने के भी आरोप लगाए गए हैं।
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि हिंसा में बड़ी संख्या में बाहरी लोग भी शामिल थे। याचिका के अनुसार, इनमें करीब 30 साल की उम्र के पुरुष और महिलाएं शामिल थे, जिनमें से कुछ खुले वाहनों से कैंपस पहुंचे थे। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों के पास वॉकी-टॉकी थे और उन्होंने तलवार, रॉड, बंदूक और दरांती जैसे हथियार दिखाए। कुछ लोगों ने चेहरे ढक रखे थे। हालांकि, ये सभी दावे फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि हिंसा में LPU के कुछ छात्र और कैंपस के बाहर PG में रहने वाले छात्र भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन उसके मुताबिक बड़ी संख्या में बाहरी लोग भी इसमें शामिल थे। इसी आधार पर याचिका में घटना को अचानक हुआ विरोध प्रदर्शन न बताकर कथित तौर पर 'सुनियोजित और संगठित हमला' बताया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इसके पीछे कुछ लोग या संगठन हो सकते हैं, जिनका उद्देश्य यूनिवर्सिटी की छवि खराब करना और पंजाब में माहौल बिगाड़ना था। इन आरोपों पर कोर्ट ने अभी कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।
याचिका में राजपुरा स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में इससे एक रात पहले हुई कथित हिंसा का भी जिक्र किया गया है। याचिका के मुताबिक, वहां भी दो छात्राओं के लापता होने या आत्महत्या करने से जुड़ी ऐसी ही अफवाहों के बाद हिंसा भड़की थी। याचिका में कहा गया है कि उस मामले में यूनिवर्सिटी और पुलिस दोनों ने ऐसी घटना से इनकार किया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की अफवाहों के बाद होने वाली हिंसा का सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को होता है और इससे कैंपस में डर का माहौल बनता है।
अब हाईकोर्ट द्वारा मांगी गई पुलिस की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट से जांच की स्थिति और हिंसा से जुड़े आरोपों पर पुलिस की अब तक की कार्रवाई की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।