
(चंडीगढ): पंजाब के नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह की रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर गुरूग्रंथ साहिब की बेअदबी और बाद मे सिखों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन पर पुलिस फायरिंग की घटनाओं की जांच सीबीआई को सौंपने की मंशा पर सवाल उठाए है। उन्होने शनिवार को यहां कहा कि मुख्यमंत्री यह स्पष्ट करें कि क्या रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट सही है। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट सही है तो वे आगे जांच सीबीआई को क्यों देना चाहते है।
चीमा ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कमीशन ने गुरूग्रंथ साहिब की बेअदबी और पुलिस फायरिंग के दोषियों के नाम उजागर किए है। अब रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाना चाहिए। तब वे चाहे पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल हों या फिर पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखवीर सिंह बादल या फिर पुलिस अधिकारी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब पूर्व अकाली मंत्री विक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ ड्रग मामले में सीबीआई जांच की मांग उठाई गई थी तब कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि सीबीआई को सौंपे जाने से जांच में बहुत समय लगेगा और पंजाब पुलिस जांच में सक्षम है। चीमा ने कहा कि अब ऐसी क्या मजबूरी है कि मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई पंजाब पुलिस को सौंपने के बजाय सीबीआई को सौंपना चाहते है। उन्होंने कहा कि सीबीआई केन्द्र सरकार के अधीन है और केन्द्र में भाजपा-अकाली दल की सरकार है। मामला सीबीआई को सौंपकर मुख्यमंत्री अकाली नेताओं को बचाना चाहते।
चीमा ने कहा कि रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट अभी विधानसभा में पेश की जानी है और इससे पहले ही रिपोर्ट लीक कर दी गई। इसके पीछे भी मंशा अकाली नेताओं को बचाने की दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट लीक करके अकाली नेताओं को विधानसभा में अपने बचाव का मौका दिया गया है। उन्होंने कहा कि रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखवीर बादल समेत सभी दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। इसी दौरान कोटकपुरा से आम आदमी पार्टी विधायक कुलतार सिंह ने कहा कि गुरूग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं राजनीतिक साजिश का परिणाम थीं।
वर्ष 2015 में एक जून को फरीदकोट जिले के गुरूद्वारा बुर्ज जवाहर सिंह वाला से गुरूग्रंथ साहिब का बीर चोरी गया था। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके 22 दिन बाद 23 जून से गुरू ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाए हुई। उस समय किसानों को फसल का सही मूल्य देने,बेरोजगारी दूर करने और सवच्छ प्रशासन देने जैसी मांगों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक साजिश के तहत इन घटनाओं को अंजाम दिया गया।
कुलतार सिंह ने कहा कि उस समय विधायक मनतार सिंह से आयुक्त और उपायुक्त जैसे अधिकारियों ने बातचीत की थी और विधायक की भूमिका संदेह के घेरे में थी। इसलिए विधायक की भूमिका की जांच कराई जाना चाहिए। विधायक दल की बैठक में पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल सिंह खैहरा के न पहुंचने के सवाल पर चीमा ने कहा कि अभी विधायक दल की बैठक औपचारिक रूप से नहीं बुलाई गई है। जब औपचारिक बैठक बुलाई जायेगी तब उन्हें बुलाया जाएगा।