MK stalin news
लगभग ढाई महीने की चुनाव आचार संहिता हटने के बाद तमिलनाडु में प्रशासनिक गतिविधियों को गति देने की शुरुआत के तहत चौदह जिला कलक्टरों और वरिष्ठ अफसरों के साथ मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को सचिवालय में समीक्षा बैठक की। आचार संहिता लागू होने की वजह से सरकारी दफ्तरों में चहल-पहल नहीं थी तो अन्य विकास कार्यों की गति पर विराम लग चुका था। सीएम ने धूल फांक रही फाइलों को टटोला तो अधिकारियों से मानसून संबंधी तैयारियों के अलावा अन्य हितकारी योजनाओं के शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। सीएम ने समीक्षा बैठक में समाज में नशीली दवाओं के खतरे के मुद्दे को उठाते हुए कलक्टरों को विशेष ध्यान देने और नशीली दवाओं के प्रचलन को खत्म करने के लिए एक व्यापक आंदोलन शुरू करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने चेन्नई में बढ़ती नशाखोरी और तस्करी को लेकर सिलसिलेवार समाचार प्रकाशित किए थे।
ग्रामीण क्षेत्रों में 15 जुलाई से एक महीने के लिए मक्कलुदम मुदलवर कार्यक्रम शुरू करने के अलावा उंगलै थेडी उंगल ऊरिल और नींगल नालमा जैसी अन्य योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों ने पट्टा प्राप्त करने संबंधी समस्याओं का उल्लेख किया है उनका तत्काल निराकरण होना चाहिए। कलैंजरिन कणवु इल्लम योजना को गति दी जाए जिसके तहत एक लाख आवासों का निर्माण होना है। सीएम ने स्कूलों में सुबह के नाश्ते समेत अन्य योजनाओं पर भी जरूरी निर्देश दिए।
जन कल्याणकारी योजनाएं लागू करें
अगले दो वर्षों को तमिलनाडु के विकास और प्रगति के लिए बहुत महत्वपूर्ण अवधि बताते हुए, स्टालिन ने कहा कि उनका कर्तव्य है कि वे नए जोश के साथ जन कल्याणकारी योजनाओं को लागू करें। सुशासन देने के लिए, कानून और व्यवस्था बनाए रखना, सामाजिक कल्याण योजनाओं को क्रियान्वित करना, बुनियादी ढांचे का विकास करना, रोजगार पैदा करना और लोगों को सरकारी सेवाओं की निर्बाध डिलीवरी सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है। यही सुशासन की परिभाषा है और हम यही कर रहे हैं।
नशीली दवाएं सामाजिक मसला
स्टालिन ने कहा कि हमने राज्य में नशीली दवाओं के प्रचलन को काफी हद तक नियंत्रित किया है। यह पर्याप्त नहीं है। नशीली दवाओं का प्रचलन केवल कानून और व्यवस्था की समस्या नहीं है, यह सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी समस्या भी है। तमिलनाडु में नशीली दवाओं के प्रचलन को पूरी तरह से खत्म किया जाना चाहिए। हमें इस दिशा में एक व्यापक आंदोलन शुरू करना चाहिए। जिला कलक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने जिलों में नशीली दवाओं के उन्मूलन के लिए सभी गतिविधियां शुरू करने की सलाह देते हुए, क्षेत्र विशेषों की पहचान की जाए जहां इनका प्रचलन अधिक है और फिर यह सुनिश्चित किया जाए कि वह नशा मुक्त क्षेत्र बन जाए।