
चेन्नई.
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास ने यूरोपियन यूनियन के साथ समझौता किया है जिसके तहत विद्यार्थियों को प्लेसमेन्ट से पूर्व उद्योगों में काम करने का अवसर मिल सकेगा। इससे उद्योगों की जरूरतें पूरी होने के साथ ही छात्रों को सीखने का मौका मिल सकेगा। विकसित देशों में तकनीकी शिक्षा का नया कॉन्सेप्ट डुएल एजुकेशन है।
इसमें उद्योगों के अनुभव के साथ ही सीखने को भी मिलता है। इसके तहत विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही काम करने का मौका भी मिल जाता है।
आईआईटी मद्रास ने दो पाठ्यक्रमों को इसके साथ जोड़ा है। जिनोमिक्स रिसर्च के साथ बायोटेक्नोलॉजी विभाग तथा पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के साथ ओसियन इंजीनियरिंग विभाग। इसके तहत इन विभागों के छात्रों को स्नातकोत्तर छात्रों को जिनोमिक्स एवं पेट्रोलियम इंजीनियरिंग क्षेत्र में काम करने का मौका मिल सकेगा।
आईआईटी मद्रास में आयोजित कार्यशाला में करीब बीस औद्योगिक पार्टनर शामिल हुए। आईआईटी मद्रास ओसियन इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर राजेश नायर इस प्रोजेक्ट के क्षेत्रीय समन्वयक बनाए गए हैं।
आईआईटी मद्रास के डीन प्रोफेसर रविन्द्र गेट्टू ने कहा कि आईआईटी मद्रास देश का शीर्ष श्रेणी का संस्थान है। इनोवेशन अचीवमेन्ट श्रेणी में संस्थान पिछले चार साल से लगातार शीर्ष पर स्थान बनाए हुए है। अब औद्योगिक इकाइयों के साथ करार होने से छात्रों को स्नातक करने से पहले ही बहुत अनुभव मिल सकेगा।
आईआईटी मद्रास बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डी. करुणाकरण ने कहा कि इस पहल से स्टार्टअप को प्रोत्साहन मिलेगा। जब विद्यार्थी अपने अध्ययन के दौरान ही इंडस्ट्री को भी समझ लेगा तो उसे स्टार्टअप में भी मदद मिल जाएगी। विद्यार्थियों को औद्योगिक इकाइयों में काम के दौरान गाइड की मदद भी मिल सकेगी।