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ब्रेनस्टेम का 3डी एटलस होगा मददगार : दिमाग में क्या चल रहा है, कौनसी बीमारियां करती हैं इसे प्रभावित

आइआइटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि ने कहा कि अब हमारे पास यह बताने का साधन है कि बीमारियों का मानव मस्तिष्क के बेसिक स्ट्रक्चर पर क्या असर पड़ता है। यह खोज मानव मस्तिष्क की जटिलता को समझने का सबसे जरूरी पहला कदम है।एसजीबीसी प्रमुख प्रो. मोहनशंकर शिवप्रकाशम ने कहा कि हमारा सपना है कि ये एटलस न्यूरोसाइंस और न्यूरोमेडिसिन में व्यापक उपयोगी साबित हों।

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ब्रेनस्टेम का 3डी एटलस

चेन्नई. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आइआइटी मद्रास) के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर (एसजीबीसी) ने मानव ब्रेनस्टेम का दुनिया का सबसे विस्तृत 3डी सेल-रेज़ोल्यूशन एटलस पेश किया है। इसे ‘एंकर’ नाम दिया गया है। यह एटलस जन्मपूर्व अवस्था से लेकर वयस्क मस्तिष्क तक के ब्रेनस्टेम का संपूर्ण नक्शा दिखाता है।

इस एटलस में 200 से अधिक ब्रेनस्टेम न्यूक्लिआई और फाइबर ट्रैक्ट शामिल हैं, जिन्हें सैकड़ों सीरियल सेक्शन से पुन: गठित कर तैयार किया गया है। इसमें आठ इम्यूनोस्टेन तकनीकों को 500 से अधिक सेक्शन पर ओवरले कर अलग-अलग न्यूरोकेमिकल सेल टाइप्स को समझने का प्रयास किया गया। इसे सार्वजनिक वेबसाइट एंकर ह्यूमनब्रेन पर उपलब्ध कराया गया है।

वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की राययह एटलस हाल में आयोजित तीसरे ब्रिक्स न्यूरोसाइंस सिम्पोजियम 2026 में प्रस्तुत किया गया था। देश के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने इसे न्यूरोबायोलॉजी की दुनिया में एक बड़ी कामयाबी बताया है। उनके अनुसार यह डिजिटल मैप क्लिनिकल उपचार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

आइआइटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि ने कहा कि अब हमारे पास यह बताने का साधन है कि बीमारियों का मानव मस्तिष्क के बेसिक स्ट्रक्चर पर क्या असर पड़ता है। यह खोज मानव मस्तिष्क की जटिलता को समझने का सबसे जरूरी पहला कदम है।एसजीबीसी प्रमुख प्रो. मोहनशंकर शिवप्रकाशम ने कहा कि हमारा सपना है कि ये एटलस न्यूरोसाइंस और न्यूरोमेडिसिन में व्यापक उपयोगी साबित हों।

एंकर एटलस के प्रमुख लाभ

बीमारियों की पहचान: ब्रेनस्टेम के जख्मी सेल पॉपुलेशन की पहचान संभव होगी।

क्लिनिकल उपचार: डॉक्टरों को बेहतर इलाज की दिशा में मदद मिलेगी।

न्यूरोलॉजिकल रिसर्च: डिमेंशिया, अल्जाइमर और रेबीज जैसी बीमारियों पर असर का अध्ययन किया जा सकेगा।

वैश्विक सहयोग: दुनिया भर के शोधकर्ताओं, डॉक्टरों और मरीजों को यह सर्वसुलभ होगा।भारत की प्रतिष्ठा: न्यूरोसाइंस में भारत की वैश्विक पहचान मजबूत होगी।

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