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सुरेंद्रनगर के कोचाडा गांव में आधी रात चला रेस्क्यू ऑपरेशन, 6 लोगों को नाव से निकाला

राजकोट. सुरेंद्रनगर जिले की पाटड़ी तहसील के कोचाडा गांव में भारी बारिश के कारण उत्पन्न गंभीर स्थिति के बीच फंसे 6 लोगों को जिला प्रशासन ने रविवार मध्यरात्रि बाद नाव से बाहर निकालकर बचा लिया। जिला कलक्टर जी.एच. सोलंकी के मार्गदर्शन में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत एवं बचाव अभियान को अंजाम दिया।
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Midnight rescue operation in Surendranagar's Kochada village; 6 people evacuated by boat

सुरेंद्रनगर जिले के कोचाडा गांव में भारी बारिश के कारण उत्पन्न गंभीर स्थिति के बीच फंसे 6 लोगों को बचाया।

भारी बारिश के चलते लखतर और नलकांठा के 10 से अधिक गांवों के किसानों के खेत टापू में तब्दील

राजकोट. सुरेंद्रनगर जिले की पाटड़ी तहसील के कोचाडा गांव में भारी बारिश के कारण उत्पन्न गंभीर स्थिति के बीच फंसे 6 लोगों को जिला प्रशासन ने रविवार मध्यरात्रि बाद नाव से बाहर निकालकर बचा लिया। जिला कलक्टर जी.एच. सोलंकी के मार्गदर्शन में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत एवं बचाव अभियान को अंजाम दिया।
जानकारी के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन रविवार मध्यरात्रि बाद 1:10 बजे शुरू किया गया और कड़ी मशक्कत के बाद रविवार मध्यरात्रि बाद 2:30 बजे इसे पूरा किया गया। इस दौरान फायर टीम ने जोखिम भरे हालात में नाव के माध्यम से सभी 6 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
जिला प्रशासन के अनुसार, नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रशासन 24 घंटे अलर्ट मोड में कार्य कर रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना आवश्यक कारण घरों से बाहर न निकलें तथा सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलने वाली किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।

5 हजार बीघा भूमि पर की गई बुवाई को भारी नुकसान

सुरेंद्रनगर जिले में फिलहाल बारिश थम गई, लेकिन उसके बाद जिले की स्थिति बेहद खराब हो गई है। लखतर और नलकांठा क्षेत्र के दसाडा, लीमडी तहसीलों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। लखतर तथा नलकांठा क्षेत्र के 10 से अधिक गांवों के किसानों के खेतों में पानी भर जाने से लगभग 15 हजार बीघा भूमि पर की गई बुवाई को भारी नुकसान पहुंचा है। फिलहाल खेत पूरी तरह टापू जैसे दिखाई दे रहे हैं।
डेरवाला, कडू, कडम, साकर, नानी कठेची, मोटी कठेची, गलथल, राणागढ़ सहित कई गांवों के खेत जलमग्न हो गए हैं। किसानों ने महंगे बीज, दवाइयां, उर्वरक और मजदूरी पर भारी खर्च कर बुवाई की थी, लेकिन लगातार बारिश ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। मुख्य फसलों में कपास, अरंडी, तिल और मूंगफली पूरी तरह पानी में डूब गई हैं और बुवाई नष्ट हो गई है। किसानों का कहना है कि अब उनकी लागत निकलने की भी कोई उम्मीद नहीं बची है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि तत्काल सर्वे कराया जाए, भूमि कटाव और फसल नुकसान का आकलन किया जाए तथा प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा पैकेज घोषित किया जाए।