
कानपुर. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल आतंकी हमले में कानपुर के चकेरी निवासी शुभम द्विवेदी (30) को उनकी पत्नी ऐशान्या के सामने सिर में गोली मारी गई थी। शादी के महज दो महीने बाद ही ऐशान्या की दुनिया उजड़ गई। साथ जीने के सपने जो शुरू ही हुए थे, एक झटके में खत्म हो गए। गोलियों की आवाजें तो थम गईं, लेकिन असर आज भी जिंदा है। ऐशान्या के लिए तो समय जैसे वहीं ठहर गया है। हालांकि, उनका मन बदला नहीं चाहता। कहती हैं- 'मुझे बदला नहीं चाहिए, मुझे यह यकीन चाहिए कि किसी और ऐशान्या के सामने उसके शुभम को गोली न मारी जाए।'
ऐशान्या कहती हैं, 'न तो शादी की पहली सालगिरह मना पाई और न ही कोई त्योहार। दिवाली, होली, करवा चौथ, सब कुछ बेमानी हो गया। हर खुशी अब अधूरी लगती है।… अब तो बस यादें ही हैं।' न्याय की बात पर उनका स्वर सख्त हो गया, बोलीं- जब तक आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होगा, तब तक सच्चा सुकून मिल ही नहीं सकता। धर्म के आधार पर हमला संगठित नफरत का एक रूप है। आंख बंद करती हूं तो वही चेहरा, वही आवाज, वही खून।… यह दर्द अब मेरी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
एमबीए कर चुकी ऐशान्या अब समाजसेवा के जरिए अपने जीवन को दिशा देना चाहती हैं। राजनीति में आने के सवाल पर ऐशान्या कहती है कि मैंने कभी इस बारे में नहीं सोचा था। लेकिन अब जब जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है, तो इसे एक मकसद देना चाहती हूं। शुभम हमेशा कहता था कि हमें लोगों के लिए कुछ करना चाहिए। अब मैं वही करूंगी। खासकर उन महिलाओं के लिए जो हिंसा का शिकार होती हैं। उनके लिए अब व्यक्तिगत जीवन से ज्यादा महत्त्वपूर्ण वह उद्देश्य है, जिसमें वे दूसरों के लिए कुछ कर सकें।
शुभम के पिता संजय द्विवेदी ने ऑफिस की मेज पर बेटे की तस्वीर लगा रखी है। हर दिन उसे देखकर ही काम की शुरुआत करते हैं। यह तस्वीर ही अब उनके जीने का सहारा है। संजय द्विवेदी बताते हैं, '22 तारीख को हमने अपने पैतृक गांव हाथीपुर में शुभम के नाम से भोज किया है। गरीबों को खाना खिला कर आ रहे हैं। यह श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि बेटे की मौजूदगी को महसूस करने का एक जरिया है। लगता है वो यहीं कहीं है, सब देख रहा है। बेटे की याद हर दिन आती है, लेकिन जिंदगी को जैसे-तैसे आगे बढ़ाना ही पड़ता है।'
शुभम की याद में उनके पैतृक गांव हाथीपुर में एक भव्य स्मृति द्वार बनवाया गया है, जिसका लोकार्पण तीन महीने पहले हुआ। यह द्वार गांव के लोगों के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक बन गया है। इसके साथ ही गांव में शुभम द्विवेदी स्मृति पार्क बनाने की योजना भी तैयार की गई है, जिसके लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। यह पार्क आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने का कार्य करेगा।
Updated on:
25 Apr 2026 11:36 am
Published on:
25 Apr 2026 09:32 am
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