चेन्नई

छात्रों एवं शिक्षकों के सामूहिक योगदान से आईआईटी मद्रास को मिली विश्व स्तर पर पहचान

छात्रों एवं शिक्षकों के सामूहिक योगदान से आईआईटी मद्रास को मिली विश्व स्तर पर पहचान -आईआईटी मद्रास का डायमंड जुबली समारोह में वक्ताओं ने कहा

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चेन्नई. आईआईटी मद्रास के 60 साल पूरे होने पर विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान छह दशक की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एनआईआरएफ रैंकिंग के अनुसार लगातार चौथे वर्ष आईआईटी मद्रास को देश के इंजीनियरिंग संस्थानों में ओवरऑल श्रेणी में श्रेष्ठ शिक्षण संस्थान से नवाजा गया है। पिछले छह दशक मे ंछात्रों एवं शिक्षकों के सामूहिक योगदान के चलते संस्थान को विश्व स्तर पर पहचान मिली है।
आईआईटी मद्रास परिसर में आयोजित डायमंड जुबली समारोह में जर्मनी की महावाणिज्य दूत करिन स्टोल ने कहा कि जर्मनी ने भी आईआईटी मद्रास को देश के श्रेष्ठ संस्थान बनाने की दिशा में समर्थन किया है। जर्मनी की ओर से तकनीकी आधार पर सहयोग किया गया है। जर्मनी में छात्रवृत्ति के जरिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया। आईआईटी मद्रास ने 35 जर्मन विश्वविद्यालयों के साथ समझौता किया है। आईआईटी मद्रास अपनी तकनीकी शिक्षा के साथ ही नवाचार, उद्यमिता, अनुसंधान, शैक्षिक एवं औद्योगिक परामर्श के लिए भी जाना जाता है।
आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर भास्कर राममूर्ति ने कहा कि हमारे लिए संस्थान के साठ साल की विकास यात्रा का जायजा लेने का समय है। उन्होंने पूर्व छात्रों से भी आह्वान किया कि वे संस्थान से जुड़े रहते हुए संस्थान को आगे ले जाने में सहयोग करें।
आईआईटी मद्रास के पूर्व निदेशक प्रोफेसर एम.एस. अनंत, प्रोफेसर आर. नटराजन का भी इस मौके पर सम्मान किया गया। इस अवसर पर आईआईटी मद्रास के वर्ष 1964 में पहले बैच के छात्रों का सम्मान भी किया गया।
आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र एवं इन्फोसिस के सह संस्थापक कृष गोपालकृष्णन ने कहा कि आईआईटी मद्रास में प्रवेश लेने के बाद कम्प्यूटर से मेरा परिचय हुआ। इस संस्थान की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। आईआईटी मद्रास एलुमिनी एसोसिएशन की अध्यक्ष सुबा कुमार ने समारोह के आयोजन पर प्रकाश डाला।

Published on:
02 Aug 2019 05:30 pm