
चेन्नई। तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (तस्माक) ने मद्रास उच्च न्यायालय को सूचित किया कि खाली बोतलों की पुनर्खरीद (बाय बैक) योजना के तहत हर शराब बोतल पर 10 रुपए की वापसी योग्य जमा राशि को अब अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही वैट अधिनियम और नियमों में संशोधन का प्रस्ताव भी राज्य सरकार के विचाराधीन है। तस्माक के प्रबंध निदेशक के नंदकुमार ने विशेष वन संबंधी मामलों की पीठ के समक्ष यह स्थिति रिपोर्ट दाखिल की।
इस दौरान एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने जस्टिस एन. सतीश कुमार और जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती के समक्ष जानकारी प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन मेड फॉरेन लीकर (आइएमएफएस) और बीयर उत्पादकों के संघों ने सिद्धांत रूप में खाली बोतलों के संग्रहण की जिम्मेदारी स्वीकार की है। वे तस्माक की ओर से निर्धारित तकनीक के उपयोग से अपने कार्मिकों के माध्यम से यह कार्य करेंगे। तस्माक ने बताया कि वह पुनर्खरीद योजना को संशोधित करने और क्रियान्वयन के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है।
महाधिवक्ता की विधिक राय के बाद मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की संभावनाओं की जांच की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रस्तावित है कि उपभोक्ताओं से 10 रुपए की जमा राशि अलग से न लेकर, इसी राशि को प्रत्येक शराब बोतल के एमआरपी में शामिल किया जाए। इसके अलावा, खाली शराब बोतलों के संग्रह, परिवहन, पुनर्चक्रण और पर्यावरणीय दृष्टि से उचित निस्तारण की जिम्मेदारी संबंधित उत्पादकों को दी जाएगी। इसके लिए क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग तंत्र लागू करने का भी प्रस्ताव है।
तस्माक ने निषेध और आबकारी आयुक्त से आग्रह किया कि तमिलनाडु निषेध अधिनियम, नियमों और आइएमएफएस व बीयर उत्पादकों के लाइसेंस शर्तों में आवश्यक संशोधन शुरू किए जाएं। वाणिज्यिक कर आयुक्त ने राज्य सरकार को एमआरपी में 10 रुपए की अतिरिक्त उपकर लगाने का प्रस्ताव भेजा है, जो अब सरकार के विचाराधीन है। आपको बता दें कि टीएएसएमएसी राज्य में शराब की बिक्री करने वाली एकमात्र सरकारी संस्था है। फिलहाल तमिलनाडु में इसकी 4,048 शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं। इन दुकानों से इंडियन मेड फॉरेन लिकर (आईएमएफएल), बीयर, वाइन और आयातित शराब की बिक्री होती है। इनकी बिक्री से राज्य सरकार को औसतन 150 करोड़ रुपए प्रतिदिन का राजस्व प्राप्त होता है, जिससे यह सरकार की सबसे बड़ी आय के स्रोतों में से एक है।