-समग्र शिक्षा अभियान की सर्वे
चेन्नई. कोरोना महामारी के बाद से अब तक 1.४ लाख विद्यार्थी ऐसे हैं जो अभी तक स्कूल में वापसी नहीं किए हैं। समग्र शिक्षा अभियान के सर्वेंक्षण में इसका खुलासा हुआ और राज्य प्रोजेक्ट निदेशक आर. सुदन ने इसकी जानकारी दी। बाल श्रम के खिलाफ डिजीटल अभियान शुरू करते हुए उन्होंने बताया राज्य सरकार ने अगस्त से राज्य में संभावित ड्रॉपआउट की पहचान की है। संभावित ड्रॉपआउट की पहचान उन छात्रों की पुष्टि के आधार पर की गई है, जिन्होंने अपनी टीसी प्राप्त की और स्कूल में शामिल नहीं हुए और जिन्होंने सूखा राशन व पाठ्यपुस्तक प्राप्त नहीं किया। इस प्रकार से संभावित ड्रॉपआउट की संख्या 5.१३ लाख पहुंच गई थी।
बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने उन बच्चों के बारे में पूछताछ करने के लिए घर घर सर्वेक्षण करने के लिए शिक्षकों और ब्लॉक संसाधन प्रशिक्षकों को नियुक्त किया। इसके अलावा शिक्षकों को बच्चों के घर भी भेजा जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रयासों की वजह से 1.४ लाख बच्चों ने स्कूल में फिर से वापसी की।
-चार लाख बच्चे आईटीआई में हुए शामिल
उन्होंने कहा कि सर्वे में पता चला है कि चार लाख से अधिक बच्चे आईटीआई में शामिल हो गए और 1.४ लाख बच्चों ने वापसी ही नहीं की। विभाग ने स्कूल न जाने वाले बच्चों का नाम, उनके माता पिता का नाम, स्कूल और गांव का विवरण जिला कलक्टरों के साथ साझा किया है। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा रोजाना कार्यों की समीक्षा भी की जा रही है। आशा करते हैं कि जल्द से जल्द सभी बच्चों को वापस स्कूल लाया जाएगा। अगले दो से तीन महीनों के अंदर इस प्रयास के सफल होने की उम्मीद की जा रही है। ड्रापआउट से बाल श्रम और बाल विवाह में भी वृद्धि दर्ज होती है। इसको रोकने के लिए बच्चों को स्कूल वापस लाना बहुत जरूरी है। उनको वापस लाने के लिए सरकार द्वारा हर संभव कदम उठाया जाएगा।