
R Veeramani Case:मद्रास हाईकोर्ट ने ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि से जुड़े मामले की जांच तमिलनाडु पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) से लेकर सीबीआई को सौंपने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि एसआईटी का गठन केवल चार दिन पहले किया गया है, इसलिए उसे संवेदनशील मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि जांच एजेंसियों के पास कोई जादुई तरीका नहीं होता कि वे एक साथ सभी साक्ष्य जुटा लें। एसआईटी को साक्ष्य एकत्र करने और जांच आगे बढ़ाने का अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने माना कि जांच प्रक्रिया समय लेने वाली होती है, विशेषकर ऐसे मामलों में जिनमें गंभीर और संवेदनशील आरोप शामिल हों।
बता दें कि पत्रकार वराकी ने याचिका दायर कर मामले की जांच सीबीआइ को सौंपने की मांग की थी। उनका कहना था कि कुछ उच्च पदस्थ अधिकारियों के नाम सामने आने की आशंका है और एसआईटी स्वतंत्र एवं प्रभावी जांच नहीं कर पाएगी। याचिका में यह भी कहा गया था कि यह जांच की जानी चाहिए कि कहीं किसी प्रकार का दबाव, हस्तक्षेप या अन्य प्रभाव तो नहीं पड़ा, साथ ही मामले से जुड़े पेन ड्राइव की फॉरेंसिक जांच और साक्ष्यों के संरक्षण की भी समीक्षा होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि यह मामला बच्चों से जुड़ा है, जिनमें कुछ अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 'मुझे बच्चों की ज्यादा चिंता है। इस मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जा सकता। इसकी गंभीरता को समझिए और प्रचार के लिए इसका उपयोग मत कीजिए।'
वहीं, जब याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है, तब अदालत ने पूछा कि एसआईटी को पर्याप्त समय दिए बिना इस तरह के निष्कर्ष पर कैसे पहुंचा जा सकता है? अदालत ने यहां तक कहा कि यदि किसी के पास कोई ठोस सामग्री या साक्ष्य हैं तो उन्हें जांच एजेंसी को सौंपना चाहिए।
राज्य के लोक अभियोजक जॉन सत्यन ने अदालत को आश्वस्त किया कि कोई भी व्यक्ति संबंधित साक्ष्य एसआईटी को दे सकता है और सभी पहलुओं की जांच तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाई जाएगी। इसके बाद अदालत ने वराकी को निर्देश दिया कि वे एक अक्टूबर को एसआईटी के समक्ष उपस्थित होकर अपने पास उपलब्ध सभी दस्तावेज और साक्ष्य सौंपें।