छतरपुर

छतरपुर की सड़कें निगल रहीं पैदल जिंदगियां; आधे साल में 73 पैदल लोगों की गई जान

हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवरस्पीड (तेज रफ्तार) है। जिले की ग्रामीण और नेशनल हाईवे वाली सड़कों पर न फुटपाथ हैं, न जेब्रा क्रॉसिंग और न ही चालकों में ट्रैफिक नियमों का डर।
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Jul 27, 2026
accident
सडक़ दुर्घटना

जिले भर की सड़कें अब तेज रफ्तार का शिकार हो रही हैं। जनवरी से जून तक बीते 6 महीनों में जिले में हुए 440 सड़क हादसों में 161 लोगों की मौत हो चुकी है। चिंताजनक बात यह है कि इनमें सबसे ज्यादा 73 पैदल यात्री शामिल हैं। यानी हर ढाई दिन में एक पैदल चलने वाला इंसान जिले की सड़क पर अपनी जान गंवा रहा है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़े बता रहे हैं कि हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवरस्पीड (तेज रफ्तार) है। जिले की ग्रामीण और नेशनल हाईवे वाली सड़कों पर न फुटपाथ हैं, न जेब्रा क्रॉसिंग और न ही चालकों में ट्रैफिक नियमों का डर। वर्तमान में बरसात का मौसम होने से ग्रामीण सड़कें कीचड़ और गड्ढों से भरी हैं, जिससे विजिबिलिटी कम हो गई है और हादसों का खतरा दोगुना बढ़ गया है।

6 महीने का खौफनाक आंकड़ा

जिला ट्रैफिक विभाग के अनुसार 1 जनवरी से 30 जून तक छतरपुर जिले में 440 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 161 लोगों की मौत हुई और 487 लोग घायल हुए।मौतों का विभाजन: 161 मौतों में 73 पैदल यात्री, 52 दोपहिया सवार, 24 चार-पहिया सवार और 12 अन्य लोग शामिल हैं। कुल मौतों में 45 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सिर्फ पैदल चलने वालों का है।हादसों का समय: अस्पताल में दर्ज मामलों के विश्लेषण से सामने आया कि सुबह 8 से 10 बजे और शाम 5 से 9 बजे के बीच हादसे सबसे ज्यादा हो रहे हैं। इसी समय स्कूल, मंडी और बाजार में आवाजाही पीक पर रहती है।

ओवरस्पीड का कहर और हॉटस्पॉट बनीं सड़कें

जांच में सामने आया कि 440 में से 305 हादसे ओवरस्पीड की वजह से हुए। इसके अलावा नशे में ड्राइविंग, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना और गलत दिशा में आना भी प्रमुख वजहें हैं।हॉटस्पॉट: नौगांव-छतरपुर नेशनल हाईवे, छतरपुर-सागर रोड, छतरपुर-टीकमगढ़ रोड और बिजावर-बड़ा मलहरा मार्ग हादसों के मुख्य हॉटस्पॉट बन गए हैं।रफ्तार पर बेकाबू वाहन: कई जगह जहाँ 80 किमी प्रति घंटा की स्पीड लिमिट है, वहाँ वाहन 100 से 110 की रफ्तार से दौड़ रहे हैं। हाईवे पर पुलिस गश्त की कमी है और चालान कटने के बावजूद चालकों में खौफ नज़र नहीं आता।पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षा नदारद73 पैदल यात्रियों की मौत के पीछे सबसे बड़ा कारण सुविधाओं का अभाव है। शहर के अलावा नौगांव, लवकुशनगर, गौरिहार, बिजावर और बड़ा मलहरा जैसी तहसीलों में भी फुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग नदारद हैं। बस स्टैंड, हाट बाजार और स्कूलों के सामने लोगों को जान जोखिम में डालकर रोड क्रॉस करनी पड़ती है।

इलाज में देरी से बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा

जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों का कहना है कि हादसे के बाद गोल्डन आवर (हादसे के ठीक बाद का शुरुआती एक घंटा) में इलाज न मिलने से मौतें बढ़ रही हैं। 161 में से करीब 40 लोगों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो गई। डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि ग्रामीण इलाकों से मरीज को अस्पताल तक आने में 45 मिनट से 1 घंटा लग जाता है। ऊपर से ज्यादातर लोग हेलमेट और सीटबेल्ट का इस्तेमाल नहीं करते, जिससे सिर और छाती में गंभीर चोटें जानलेवा साबित हो रही हैं।

पीड़ित परिवारों का दर्द

मार्च: नौगांव हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रक ने 17 साल के छात्र को टक्कर मार दी, जो स्कूल से पैदल घर लौट रहा था। मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

मई: बिजावर रोड पर 60 साल के किसान को तेज रफ्तार बाइक ने टक्कर मार दी, जो मंडी से पैदल घर जा रहे थे।

हर हादसे के साथ एक परिवार उजड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब तक इंजीनियरिंग, एजुकेशन और एनफोर्समेंट (नियमों का कड़ाई से पालन) तीनों मोर्चों पर काम नहीं होगा, तब तक हादसे कम नहीं होंगे।

स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें

-स्कूल और अस्पताल जोन में वाहनों की स्पीड लिमिट अधिकतम 30 किमी प्रति घंटा तय की जाए।

-हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर हर 500 मीटर पर सुरक्षित पैदल क्रॉसिंग बनाई जाए।

-नशे में ड्राइविंग करने वालों का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए।

-जिले की सभी प्रमुख सड़कों पर सीसीटीवी और स्पीड गन की संख्या बढ़ाई जाए।

फैक्ट फाइल

(जनवरी से जून)विवरण - संख्या / औसत

कुल हादसे - 440कुल घायल - 487कुल मौतें - 161प्रतिदिन का औसत - 2.4 हादसे, 2.6 घायल

महीने वार हादसे

महीना - हादसे - घायल - मौतें

जनवरी - 72 - 82 - 23

फरवरी - 65 - 67 - 26

मार्च - 84 - 102 - 29

अप्रैल - 83 - 76 - 25

मई - 80 - 97 - 37

जून - 56 - 63 - 21

कुल - 440 - 487 - 161

पिछले वर्ष से तुलना

विवरण - पिछला वर्ष - वर्तमान वर्ष - अंतर

हादसे - 551 - 440 - 111 कम

घायल - 446 - 487 - 41 ज्यादा

मौतें - 241 - 161 - 80 कम

इनका कहना है

गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष के पहले 6 महीनों में जिले में सड़क हादसों और मौतों में कमी आई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 551 हादसे और 241 मौतें हुई थीं, जो अब घटकर 440 हादसे और 161 मौतें रह गई हैं। जिले में चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर विशेष फोकस किया गया है। नौगांव रोड, सागर रोड, बायपास और बस स्टैंड जैसे हॉटस्पॉट पर स्पीड ब्रेकर और रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं। इसके साथ ही साइनेज और जागरूकता अभियान भी लगातार चलाए जा रहे हैं।

बृहस्पति साकेत, यातायात प्रभारी

Updated on:
27 Jul 2026 11:10 am
Published on:
27 Jul 2026 11:06 am